उदयपुरा रायसेन।सत्संग में मंगल गीतों के साथ राम विवाह महोत्सव मनाया गया।नगर के तहसील प्रांगण में स्थित प्रसिद्ध शिव, हनुमान मंदिर,पर संत, ग्रंथ, संदेश, मानस यात्रा के पहुंचने पर आयोजक नगर के साहित्यकार एवं वरिष्ठ कवि गोविंद गोदानी द्वारा बड़े ही उत्साह उमंग के साथ विद्वानों का तिलक,अक्षत, पुष्प अर्पित कर सम्मान किया।
इस अवसर पर आयोजित सत्संग सभा में मानस में चल रहे, पुष्प वाटिका प्रसंग के साथ ,सीताराम विवाह कथा प्रसंग को वर्णित करते हुए, श्री रामचरितमानस विद्यापीठ के राष्ट्रीय आचार्य पंडित सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में धर्म नियंत्रित काम की स्वीकृति का नाम विवाह है, सारे देव विभिन्न रूपों में प्रभु श्री राम के विवाह में सम्मिलित हुए हैं, सीता जी की शोभा प्रकृति मिश्रित सुंदरता नहीं है, उनकी शोभा आलौकिक शोभा है, जो सुंदरता को भी सुंदर करती है, वह सीता जी का स्वरूप है आज केवल सजावट हो रही है, सुंदरता नहीं है।
धर्माधिकारी राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि प्रभु श्री राम का विवाह आत्मा रूपी राम एवं शांति स्वरूपा सीता का मिलन है, इसी को सीता स्वयंवर कहते हैं, संगीताचारय हरिदास रामायणी ने सीता विवाह के सुंदर गीत, हरे बास मंडप छाए, सिया जी को राम विवाहन आए, गाकर सभी को भाव विभोर किया, सतसंग सभा में आशीष शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी, एवं योगेश पांडे ने भी प्रसंग अनुसार कथाओं का श्रवण कराया।

कार्यक्रम संचालक अधिवक्ता चतुर नारायण रघुवंशी ने सत्संग में पधारे विद्वानों एवं श्रोताओं को मंगल शुभकामनाएं देते हुए आभार प्रकट किया, हरि कीर्तन एवं सामूहिक हनुमान चालीसा गायन के साथ मानस ग्रंथ की मंगल आरती में पेंशनर संघ के अध्यक्ष गोपाल वर्मा, जिला पंचायत प्रतिनिधि राम सिंह चंदेल, युवा समाजसेवी तरबर लोधी, मूरत सिंह लोधी, निर्भय सिंह मेहरा, के एल विश्वकर्मा, रामबाबू शर्मा, गौ सेवक आशुतोष शर्मा, राज किशोर कौरव, सुरेंद्र सिंह परमार, नर्मदा प्रसाद रघुवंशी, पार्षद गंगा कहार सहित बड़ी संख्या में मानस प्रेमी जनों ने भाग लेकर दिव्य प्रसाद ग्रहण किया,