वर्षा ऋतु में और निखर आई अमरकंटक की प्राकृतिक छटा
धुंध, बारिश की रिमझिम बूंदों और हरियाली ने पर्यटकों को किया मंत्र मुग्ध
मनोज कुमार द्विवेदी अमरकंटक अनूपपुर
मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक, धार्मिक और पर्यटन नगरी अमरकंटक मे आसमानी बादलों का समूह अपनी रिमझिम बूंदों से, यहाँ की पावन धरा के पांव पखारता दिख रहा है । धरती पर उडते बादल लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

प्रकृति के चितेरे ,वरिष्ठ समाजसेवी पत्रकार श्री धनंजय तिवारी जी कहते हैं कि अमरकंटक में इन दिनों वर्षा ऋतु की छटा से स्वर्गिक आभा बिखेर रहा है।
नर्मदा उद्गम स्थल के रूप में विख्यात यह नगरी हरियाली, बादलों से घिरी पहाड़ियों और झरनों की गूंज से ऐसा दृश्य प्रस्तुत कर रही है, जो हर आगंतुक के मन को मोह लेता है।
चारों ओर हरियाली और बादलों का खेल
बरसात की बूंदों से नहाए वृक्ष, धुंध से ढकी घाटियाँ और घुमड़ते बादलों के बीच झांकती धूप—मानो प्रकृति स्वयं चित्रकार बनकर धरती पर रंग बिखेर रही हो। अमरकंटक की वादियाँ बरसात में मानो किसी चित्रकार की अद्भुत कलाकृति प्रतीत होती हैं।

नदियाँ और झरनों का संगीत —
नर्मदा, सोन और जौहिला नदियाँ वर्षा जल से लबालब होकर पूरे क्षेत्र को जीवन से भर रही हैं। झरनों की गूंजती ध्वनि दूर तक वातावरण को प्रफुल्लित कर रही है।
🌾 जलप्रपातों की गर्जना और नदियों की कलकलाहट यहाँ का वास्तविक संगीत है।
बढ़ रही पर्यटकों की संख्या ––
बरसात के इस मौसम में पर्यटकों का तांता लग गया है। देशभर से प्रकृति प्रेमी यहाँ पहुँच रहे हैं। पर्यटन विभाग ने सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं। अमरकंटक का यह जादुई रूप हर आगंतुक को जीवनभर की यादें दे जाता है।

शांति और आत्मिक सुकून का अनुभव —
अमरकंटक का यह प्राकृतिक रूप केवल आँखों को आनंदित ही नहीं करता, बल्कि आत्मा को भी गहरे सुकून से भर देता है। नर्मदा तट पर बैठकर बरसात का आनंद लेना हर व्यक्ति के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन रहा है। बरसात में अमरकंटक की वादियाँ आत्मा तक को शांति का अनुभव कराती हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था में उछाल ––
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय होटल, धर्मशालाएँ और बाजार भी गुलजार हो उठे हैं। व्यापारियों के चेहरे पर रौनक देखने लायक है। संक्षेप में कहें, बरसात का मौसम अमरकंटक को अद्वितीय रूप प्रदान करता है। हरियाली, धुंध और झरनों का संगम इस नगरी को धरती पर स्वर्ग का आभास कराता है।