धीरज जॉनसन दमोह
दमोह जिला प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़ों, झरनों और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का स्थान है। प्राकृतिक नजारे और प्राचीन मानव सभ्यता के साक्ष्य भी यहां मौजूद है

ऊंचाई से गिरता जल, मनमोहक दृश्य
दमोह और छतरपुर की सीमा पर स्थित ग्राम सिलापरी के निकट जंगल क्षेत्र से बहता पानी पथरीले और चट्टानी स्थानों से गुजरते हुए नीचे गिरकर मनमोहक झरना बनाता है। बरसात के मौसम में इसका स्वरूप और भी भव्य हो जाता है। धरा पर पानी, हरियाली से ढकी पहाड़ियां और शुद्ध वातावरण यहां आने वाले लोगों का मन मोह लेते हैं। यही कारण है कि लोग पिकनिक मनाने और घूमने आते हैं।

शैल चित्रों में झलकती प्राचीन सभ्यता
नसेनिया फॉल के आसपास की चट्टानों पर बने प्रागैतिहासिक शैल चित्र इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। यद्यपि समय के साथ ये चित्र अब धुंधले पड़ चुके हैं, लेकिन बारीकी से देखने पर इनमें इंसानों और जानवरों की आकृतियां दिखाई देती हैं। जानकारों का मानना है कि ये शैल चित्र आदिम मानव की जीवनशैली और उसकी मान्यताओं का प्रमाण हो सकते हैं।

पास की गुफानुमा चट्टानों से यह भी अनुमान लगाया जाता है कि प्राचीन काल में मानव यहां आश्रय लेता होगा, ताकि मौसम की कठिनाइयों और जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा कर सके। लोगों का यह भी कहना है कि यदि इस स्थल को विकसित और बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाए, सुरक्षित पिकनिक स्पॉट बनाया जाए तो ऐतिहासिक महत्व का यह स्थान प्रकाश में आ सकता है।स्थानीय लोग बताते हैं कि नसेनिया फॉल प्राकृतिक धरोहर है जो पर्यटन स्थल बन सकता है। यह इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का संगम है। जो केवल आनंद लेने का नहीं बल्कि प्राचीन मानव सभ्यता को समझने का भी अवसर प्रदान करता है।