शरद शर्मा बेगमगंज रायसेन
बीना नदी में बनकर तैयार हुआ मडिया डेम, और अब इसकी डूब में आ रहे हैं गांव…
चांदामऊ गांव तक पहुंच चुका है डेम का पानी, लेकिन हालात ये हैं कि कई ग्रामीण आज भी गांव खाली करने को तैयार नहीं… वजह है मुआवजा!
ग्रामीणों का कहना है – जमीन का दाम मिला चार लाख प्रति एकड़, जबकि बाजार रेट है बारह लाख रुपए… ऐसे में उनकी पुश्तैनी जमीन का क्या होगा? किसानों की पीड़ा साफ झलक रही है कि शासन ने चंद पैसों में छीन लिए कीमती खेत।

गांव के नरेंद्र गौर बताते हैं – 13 एकड़ जमीन के बदले मिले 52 लाख, लेकिन आज उस रकम से मुश्किल से 3 एकड़ जमीन भी नहीं मिल पा रही। वहीं कई लोगों का कहना है कि उनके मकान का मुआवजा आज तक नहीं मिला।
गांव की बुजुर्ग महिला गोपी बाई का दर्द और भी गहरा है – नागपंचमी की रात को घर पानी में डूब गया, पूरी गृहस्थी बर्बाद हो गई। अब दूसरे के घर में रहकर गुज़ारा करना पड़ रहा है।
करीब 25 परिवार आज भी गांव में डटे हुए हैं, क्योंकि बिना मुआवजा के वे नया घर नहीं बना सकते। कई ग्रामीणों का नाम सर्वे में छूट गया, कुछ का मामला विवाद में अटका, तो कुछ न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं।

प्रशासन की ओर से एसडीएम सौरभ मिश्रा का कहना है कि – ज्यादातर ग्रामीणों को मुआवजा दिया जा चुका है, केवल कुछ मामले विवादित हैं। नियम और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मुआवजा मिल पाएगा।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि –
क्या डेम की डूब में समाते इन गांवों के किसानों और परिवारों की जिंदगी का सही मूल्य कभी मिल पाएगा?