सुरेन्द्र जैन धरसीवां
छत्तीसगढ़ में महंगाई , जोकि भारत सरकार द्वारा 1 जनवरी और 1 जुलाई से पहले indicators को दुरुस्त कर जारी किया जाता है। फिर भी इसका लाभ सिर्फ अखिल भारतीय सेवा को समय पर दिया जाता है, मानो बाजार की महंगाई सिर्फ उन्हीं के लिए है।
अखिल भारतीय सेवा को भी राज्य के खजाने से ही भुगतान होता है, फिर ये दोहरा व्यवहार क्यों?महंगाई के लिए बजट में प्रावधान रखा जाता है, तो विधान सभा से पारित बजट में वित्त विभाग की कैंची क्यों?
इसकी शुरुआत जोगी जी 17 महीने का एरियर्स खा कर शुरू की, तब से ये परंपरा शुरू हो गई। इसके लिए दोषी कौन है आप समझ गए होंगे ।राज्य शासन के कर्मचारी तो खैरात पर निर्भर हैं, ऐसा लग रहा है।
आधी तनख़ाह पाने वाला पेंशनर्स तो सरकार की गिनती में ही नहीं हैं।
राज्य शासन के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ वित्त विभाग जान बूझ कर उनको मिलने वाले मंहगाई भत्ते और मंहगाई राहत की एरियर राशि संबंधी कार्यवाही नहीं कर हड़पने का खेल खेल जा रहा है .
१- वित्त निर्देश ३२/२०१८ दिनांक २९ मई २०१९ में जूलाई २०१७ से अप्रैल २०१८( १० माह) के एरियर राशि पर पृथक से निर्णय लेने का उल्लेख किया गया, पर कार्यवाही आज तक नहीं हुई ।
२- वित्त निर्देश ०३/२०१९ दिनांक ०८ मार्च २०१९ में दो मंहगाई भत्ते स्वीकृत किए गए (०१/०१/२०१८ से २% एवं ०१/०७/२०१८ से २% ) जेड इनका नगद भुगतान मार्च २०१९ के वेतन, जो अप्रेल २०१९ दे था, से किया गया , परंतु ०१/०१/२०१८ से २८/०२/२०१९ तक १४ माह एवं ०१/०७/२०१८ से २८/०२/२०१९ तक ०८ माह कुल २४ माह के बकाया पर पृथक से निर्णय लेने का उल्लेख किया गया, पर आज तक कार्यवाही नहीं की गई ।
यह लिखे जाने तक बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, पर उनके मौलिक अधिकारों की घोर उपेक्षा वित्त विभाग द्वारा की जा रही है । इन सबमें वित्त विभाग के अधिकारी/कर्मचारी भी शामिल हैं, परंतु स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाले कालिदास की तरह रवैया अपनाए हुए हैं।
इस उपेक्षा पूर्ण रवैये के प्रति भारतीय राज्य पेंशनर महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव और रायपुर संभाग के अध्यक्ष प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने अपना रोष प्रकट करते हुए शासन से मंहगाई भत्ते और मंहगाई राहत के एरियर राशि संबंधी आदेश अविलंब जारी करने की चेतावनी दी है । साथ ही वित्त विभाग के कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री से कार्यवाही की माँग की है ।