गहाल समिति में मूंग उपार्जन केंद्र पर प्रबंधक नदारद, सुल्तानपुर वेयरहाउस शाखा प्रबंधक ने भी मानी लापरवाही
जांच के समय ही नजर आता है समिति प्रबंधक, बाकी समय दूसरा व्यक्ति देखता है सारा काम
असलम खान सिराली हरदा
हरदा जिले के सुल्तानपुर वेयरहाउस अंतर्गत संचालित गहाल समिति के मूंग उपार्जन केंद्र पर गंभीर अनियमितताओं की स्थिति सामने आई है। केंद्र पर पदस्थ समिति प्रबंधक अक्सर ड्यूटी से नदारद रहते हैं और उनकी अनुपस्थिति में उपार्जन कार्य कोई अन्य व्यक्ति देखता है, जो कि न तो अधिकृत है और न ही प्रशिक्षित। यह खुलासा खुद सुल्तानपुर वेयरहाउ सींग शाखा के प्रबंधक देवेन्द्र मंडलोई ने किया है।
जांच के समय ही दिखाई देता है प्रबंधक
जानकारों के अनुसार, गहाल समिति का समिति प्रबंधक केवल जांच या निरीक्षण के समय केंद्र पर मौजूद पाया जाता है, बाकी दिनों में वह गायब रहता है। उसकी जगह पर एक अज्ञात व्यक्ति पूरे केंद्र का संचालन करता है, जो किसानों की उपज की तौल, रजिस्ट्रेशन, दस्तावेजों की पूर्ति जैसे कार्य करता है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में गंभीर विवाद और धोखाधड़ी की आशंका भी पैदा करता है।
शाखा प्रबंधक ने की पुष्टि
सुल्तानपुर शाखा वेयरहाउसींग प्रबंधक देवेन्द्र मंडलोई ने भी इस स्थिति की पुष्टि करते हुए कहा, गहाल समिति का प्रबंधक अधिकांश समय केंद्र पर मौजूद नहीं रहता। जब भी निरीक्षण के
लिए जाते हैं, तो अक्सर कोई और व्यक्ति काम करते पाया जाता है।यह स्वीकारोक्ति अपने आप में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, क्योंकि समिति प्रबंधक की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं उपार्जन केंद्र पर उपस्थिति रखे और समस्त प्रक्रिया की निगरानी करे।
नियमों का खुला उल्लंघन
मूंग उपार्जन केंद्रों पर कार्य संचालन संचाल के स्पष्ट नियम हैं, जिनके तहत केवल प्रशिक्षित और अधिकृत कर्मचारी ही उपज का उपार्जन, तौल और दस्तावेजी कार्य कर सकते हैं। समिति प्रबंधक की गैरमौजूदगी में यह कार्य किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाना नियमों का सीधा उल्लंघन है। इससे न केवल किसानों को असुविधा होती है, बल्कि उपार्जन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है किसानों को हो रही परेशानी गहाल समिति के अंतर्गत उपज बेचने आने वाले कई किसानों ने बताया कि कई बार उन्हें अपने दस्तावेजों के सत्यापन या भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता है। जब वे समिति प्रबंधक से बात करना चाहते हैं, तो वे अनुपस्थित रहते हैं और वहां कार्य कर रहा व्यक्ति भी उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं देता।
प्रशासन से मांग हो जांच और कार्रवाई
स्थानीय किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल जांच कर समिति प्रबंधक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही ही यह भी कहा है कि अनुशासनात्मक उपार्जन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए यदि समय रहते इस स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो उपार्जन कार्य में अव्यवस्था बढ़ सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान और प्रशासन की छवि पर भी असर पड़ेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कदम उठाता है।