Let’s travel together.

साँची विश्वविद्यालय में जापान में बौद्ध धर्म के विकास पर व्याख्यान

0 58

साँची रायसेन। साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में विशिष्ट व्याख्यान में दिल्ली विश्वविद्यालय के ईस्ट एशियन स्टडीज विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नबीन कुमार पाण्डा ने जापान में बौद्ध धर्म के विकास पर विस्तार से चर्चा की।

प्रो. पाण्डा ने बताया कि 552 ईस्वी में कोरिया के राजा सूंग द्वारा जापान में बौद्ध धर्म का प्रवेश हुआ, जिसे सोगा सम्प्रदाय का समर्थन मिला। इसके बाद बौद्ध धर्म जापान में गहराई से स्थापित हुआ और विभिन्न संप्रदायों मंम विकसित हुआ। उन्होने एक भारतीय भिक्षु बोधिसेन के योगदान की भी चर्चा की। उन्होने बताया कि दुनिया का पहला उपन्यास जापानी भाषा में एक महिला द्वारा 11वीं सदी में लिखा गया था। प्रो पाण्डा ने बताया कि बौद्ध धर्म का जापानी साहित्य पर भी बहुत प्रभाव है। भारतीय वास्तुकला के तोरण द्वार जैसा ही जापान में भी तोरी द्वार होता है। दोनों ही संस्कृतियों में इनका प्रयोग भी प्रसिद्ध भवनों के द्वार के रूप में होता है। आज जापान में 13 प्रमुख बौद्ध संम्प्रदाय हैं।

व्याख्यान की मुख्य विषयवस्तु:
नारा काल में बौद्ध धर्म का संस्थागत विकास।
झेन बौद्ध धर्म, प्योर लैण्ड बौद्ध धर्म, और निचिरन संप्रदाय का उदय।
झेन संप्रदाय ध्यान और अनुशासन को प्राथमिकता देता है। चीनी महायान से उत्पत्ति
शिंगो समुदाय- मंत्र, ध्यान के जरिये बोधि प्राप्त करना।
निचिरन संप्रदाय में लोटस सूत्र के माध्यम से भगवान बुद्ध के अलौकिक अवतार की स्तुति की जाती है। यह जापान में सबसे बड़ा बौद्ध समुदाय

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि “बौद्ध धर्म जहां भी गया, वहां की स्थानीय संस्कृति के साथ एकाकार हो गया। यह उसकी सार्वभौमिकता और समावेशिता का प्रमाण है। थेरवाद और महायान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि महायान परंपरा महात्मा बुद्ध के प्रति भक्ति और उन्हें अलौकिक रूप में देखने का माध्यम बनी, जिसने बौद्ध धर्म को एक गहन आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया।”

कार्यक्रम में धन्यवाद देते हुए साँची विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं अधिष्ठाता प्रो नवीन कुमार मेहता ने कहा कि प्रो पाण्डा ने छात्रों और शोधकर्ताओं को पूर्वी एशिया में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान किया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध अध्ययन स्कूल एवं बौद्ध दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ संतोष प्रियदर्शी ने ऐसे संवादों को बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में ज्ञानवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम का संचालन चीनी भाषा विभाग के शोधार्थी संतोष कुमार ने किया।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

15 दिन से अंधेरे में ग्राम पठा पौड़ी, बिजली-पानी को लेकर तहसील कार्यालय पर सैकड़ों ग्रामीणों का धरना     |     साईंखेड़ा में विराट 11 कुंडीय यज्ञ और रामकथा में गूंजा राम–भरत प्रेम का संदेश     |     फसल में पानी देते समय करंट लगने से किसान की मौत , डियूटी डॉ. सेन ने पोस्टमार्टम से किया इंकार      |     पत्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखाने का काम करें – विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी     |     माही पंचक्रोशी पदयात्रा का भोपावर मे हुआ भव्य स्वागत     |     तहसीलदार ने समीक्षा बैठक की, ली प्रगति की जानकारी     |     दो फरवरी को आयोजित होगा सांसद खेल महोत्सव का लोकसभा स्तरीय फाइनल और समापन समारोह     |     बिजली कंपनी  ने बिल बकाया होने पर उपभोक्ताओं के दो दिन में 40 बिजली कनेक्शन काटे     |     फैक्ट्री चौराहा पर भूसे से भरे ट्रक का त्रिपाल फटा, मचीअफरा-तफरी      |     संकल्प से समाधान अभियान के तहत  शिविर आयोजित,126 आवेदनों में से 110 का हुआ त्वरित समाधान     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811