मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
पहले जिन किसानों को गेहूं के दानों के साथ साथ भूसे की भी आवश्यकता होती थी उनके लिये अपनी फसल दैनिक खेतिहर मजदूरों के हाथों कटवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता था। कम्बाइन मशीन द्वारा फसल कटवाने पर भूसा से हाथ धोना पड़ता है। इसलिये वह किसान जिनके पास पालतू जानवर हैं चाहते हुये भी कम्बाइन मशीन का प्रयोग नहीं कर पाते थे क्योंकि ऐसी सूरत में उनके लिये चारे का संकट खड़ा हो जाता था।
इससे लोग कम्बाइन मशीन की बजाय हाथों से फसल कटवाना ही बेहतर समझते थे। भूसे की चाहत रखने वालों के लिये तो हाथ से कटवाना विवशता थी लेकिन कंबाइन मशीन से फसल कटवाने के इच्छुक भी कम परेशान नहीं थे। चूंकि कम्बाइन मशीन ऊपर से ही गेहूं की बालियों को काटती हैं इसलिए मशीन से कटवाने पर अनाज के नुकसान होने का खतरा था। कम्बाइन मशीन नीचे झुकी बालियों को उठा नहीं पाती। ऐसे में भूसा बनाने वाली मशीन लोगों के लिये वरदान साबित हो रही है।
दीवानगंज क्षेत्र में इन दिनों आधा दर्जन से अधिक मशीने चल रही हैं। इससे फसल कटवाने पर किसानों कई प्रकार का फायदा दिख रहा है। पहली बात तो ये कि उन्हें गेहूं के दानों के साथ साथ भूसा भी मिल जा रहा है। इससे पशुओं के लिये चारे की समस्या खड़ी नहीं होगी। चूंकि यह मशीन गेहूं की बालियों को लगभग उनके जड़ के पास से काटती है इसलिये अनाज के बरबाद होने का खतरा काफी हद तक कम हो जा रहा है। गेहूं की फसलों की हाथ से कटाई के बाद भी मड़ाई का काम बाकी रहता है। इसमें कई दिन लग जाते हैं। अब इन सब कामों से छुटकारा है। तत्काल भूसा एवं गेहूं दोनों मिल जा रहा है। मशीन से फसल कटवाने पर खेत में गेहूं के अवशेष लगभग न के बराबर बच रहे हैं। उन्हें जलाने की जरुरत नहीं पड़ती। इसलिये मिट्टी की उर्वरा शक्ति बची रहती है।