– गढ़ी में भागवत कथा का आयोजन
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
सनातन संस्कृति में मनुष्य जीवन के लिए पाणिग्रहण महत्वपूर्ण संस्कार है। इस संस्कार की पूर्ति के लिए जीवन में शुद्धता, सात्विकता और संकल्प होना चाहिए। श्री कृष्ण के चरित्र से हमें पाणिग्रहण से सुखद वैवाहिक जीवन की सीख मिलती है।
यह बात नगर के तहसील के कस्बा गढ़ी में चल रही भागवत कथा में कथा प्रवक्ता पंडित कृष्णदत्त मिश्र महाराज ने कही। सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन में श्री कृष्ण विवाह की लीला का मंचन हुआ। वहीं भागवत के महारास प्रसंग की चर्चा हुई। भगवान कृष्ण की महारास की लीलाओं पर रोचक कथाएं सुनाई। जिसमें बड़ी संख्या में मौजूद भक्ति कथा एवं संगीत पर नाच उठे तथा मंत्र मुग्ध हो गए।

सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच प्रवचन देते हुए पंडित कृष्णदत्त महाराज ने कहा कि वास्तव में भगवान कृष्ण मानवता की रक्षा के लिए हर काल में किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर आए हैं। उन्होंने बताया कि कृष्ण ने भारत भूमि पर धर्म के माध्यम से मानव जीवन के महत्वपूर्ण संस्कार पाणिग्रहण की शिक्षा दी है। भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए परिजनों की सहमति से वैवाहिक जीवन को स्वीकार करना चाहिए। रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुकमणी के भाई रुक्मि ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन रुक्मणि ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल भगवान गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगी। इसलिए भगवान ने उनका वरण किया तथा नारी जाति को संरक्षण दिया। कथा में श्रीकृष्ण विवाह का मंचन किया गया। इस दौरान सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु प्रवचनों में शामिल हुए। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।