गुना से गौरव शर्मा
आरोन गुना ।मध्यप्रदेश में चल रही श्रीरामकथा के द्वितीय दिवस की कथा में गुना के बालसंत शाश्वत जी महाराज जो कि मात्र 5 वर्ष की अवस्था से श्रीराम कथा व भागवत कथा शिवकथा,गौकथा,का वाचन करते आ रहे हैं व्यास जी महाराज ने कहा श्रीरामकथा कथा से पहले शिव की कथा जानना आवश्यक है, क्योंकि शिव की कथा का भी बड़ा ही महत्व है। यह बातें रघुवंशी धर्मशाला आरोन में चल रही सप्त दिवस कथा में कहा है उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने राम कथा के पहले शिव जी की कथा का वर्णन किया है। वास्तव में राम को जानने से पहले शिव के चरित्र को जानना आवश्यक है। राम के चरित्र को समाज में जन जन तक पहुंचाने वाले शिव ही हैं। शिव सुर, असुर, देव, नाग, गंधर्व सहित समस्त जीवों के स्वामी हैं। उन्होंने कहा कि शिव का पहला विवाह सती से हुआ ।सती को राम जी पर संशय होने पर शरीर त्याग करना पड़ा।वही सती अगले जन्म में पार्वती बनीं जिससे शिवजी का विवाह हुआ।और तब पार्वती जी ने शिवजी से राम राम कथा सुनने का आग्रह किया।और तब राम कथा गंगा शिवजी के मुख से लोक कल्याण के लिए समस्त चराचर जगत में प्रवाहित हुई। कथा जारी थी।कथा के बीच बीच में गीतों भजनों से गूंजा पांडाल