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नही थम रहा भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर भुसे का परिवहन,ओव्हरलोड ट्रको से हो रही ढूलाई,क्षेत्र में हो रही है भूसे की कमी

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

दो साल से किसान लगातार दलहन की फसलों की पैदावार ले रहे हैं। इससे फसलों का रकबा घटा है। भूसा परिवहन पर रोक नहीं होने से खेतों से व्यापारी भूसा खरीदकर जिले से बाहर ले जा रहे हैं। इससे सीजन में ही पशु पालकों को 800 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर भूसा खरीदना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में पशु पालकों भूसा और दाम दोनों की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
परिवहन पर रोक नहीं होने के कारण प्रतिदिन दर्जनों ट्रक भूसा जिले से बाहर जा रहे हैं। इससे भूसा का संकट लगातार बढ़ रहा है। हार्वेस्टिंग के माध्यम से कटी फसल का भूसा मशीनों से बनाया जा रहा है। इसे खेत से ही खरीद कर बाहर के व्यापारी ले जा रहे हैं।
शासन द्वारा फ्री गेहूं व चावल दिए जाने से कुछ मजदूरों ने फसल काटना बंद कर दिया है। इस कारण किसान फसल की कटाई मजबूरी में सीधे हार्वेस्टर से करा रहे हैं। हार्वेस्टर द्वारा बनाया गया भूसा महंगा पड़ता है।
व्यापारी किसानों के खेत का भूसा ठेेके में निकलवाकर साथ ले जा रहे है।
पालकों के सामने पशुओं को भूसा खिलाने के लिए समस्या खड़ी हो रही है। वर्तमान में पालकों को भूसा 800 रुपए क्विंटल तक मिल रहा है। जो भूसा थ्रेसिंग के बाद निकल रहा है वह 800 रुपए क्विंटल तक बिक रहा है। जो हार्वेस्टिंग की फसल से बनाया जा रहा है वह मोटा और क्वालिटी ठीक नहीं होने से 600 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है। पशु पालक मुकेश साहू , तुलसी शाक्य, संतोष, हरि पटेल लोधी ने बताया कि सीजन के बाद बारिश में भूसा के दाम मे 1 हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच गए थे। इससे पालकों के सामने समस्या खड़ी हो जाती है।
गांव गांव घूम रहे व्यापारी
भूसा खरीदने के लिए गांव गांव व्यापारी घूम रहे हैं। हार्वेस्टिंग के बाद व्यापारी खुद किसानों के खेत की नरवाई का भूसा ठेका में निकलवा कर ले जा रहे हैं। इसके कारण भूसा का स्थानीय स्तर पर स्टाक नहीं हो पा रहा।
यह है कारण कमी का
पहले किसान मजदूरों से फसल कटवाते थे । एक मजदूर को दिन भर में पंद्रह किलो अनाज मिल जाता था।मजदूर परिवार के लिए साल भर का स्टाक कर लेते थे। लेकिन सरकार ने मजदूरों को फ्री में गेहूं व चावल देना शुरू किया है। मजदूर धूप में कटाई करने जाते ही नहीं । कटाई से थ्रेसिंग के दौरान खासा भूसा मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में हार्वेस्टिंग की कटाई से आधा भूसा ही मिल पाता है। उसे भी व्यापारी खरीद कर ले जाते हैं। इससे लगातार समस्या आने लगी है।
खराब भूसा भट्टे वाले खरीद ले जाते हे
सोयाबीन और उड़द ,चना, मसूर का भूसा अधिकतर ईंट भट्टे वाले खरीदकर ले जाते हैं। इसके चलते सस्ता बिकने वाला खराब भूसा के रेट भी आसमान छूने लगे हैं। इससे पशु पालको को अब खराब भूसा भी नहीं मिल पाता । पशु भी उसका उपयोग नहीं करते । अच्छा भूसा जो स्टॉकिस्ट रखते हैं और जिले के बाहर भेज देते हैं। सीजन के बाद जब मांग बढ़ती है। भूसे की कमी आती है। मनमाने ढंग से मंहगे दामों पर बेचते हे।

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