रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
औद्योगिक नगर मंडीदीप में आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण को जैन धर्मा वलंबियों द्वारा उत्साह पूर्वक मनाया गया । प्राणी मात्र से क्षमा मांगकर जैन समाज ने क्षमा वाणी पर्व मनाया। इस दौरान आचार्य विधासागर महाराज के शिष्य मुनि निराकुल सागर महाराज के पावन सानिध्य में श्री जी की शोभायात्रा निकाली गई। इस पर्व का क्षमावाणी के साथ समापन हुआ। समापन अवसर पर रविवार को नगर में श्री जी की शोभायात्रा निकाली गई। यह विमान शोभायात्रा पटेल नगर स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर पटेल नगर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर जी पहुंची। इसके बाद श्रीजी के अभिषेक व शांतिधारा के साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ। चल समारोह में शामिल भक्तों में उत्लास और उत्साह को साफ देखा जा सकता था। जगह जगह विमानजी में विराजित श्रीजी की आरती उतारी गई। चल समारोह में प्रभु के समक्ष श्रावकों द्वारा चवर ढुराते हुए जयकारे लगाए गए। इस अवसर पर प्रवचन के दौरान मुनि निराकुल सागर ने कहा कि क्रोध को छोड़कर जीवन में क्षमा को सुशोभित करें। क्षमा व महक है। जो स्वयं के साथ समाज में महकती है। जीवन में बैर की खाई नहीं क्षमा का भवन तैयार करें। उन्होने कहा कि क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। दस लक्षण पर्व हमें यही सीख देता है।कि क्षमावाणी के दिन हमें अपने जीवन से सभी तरह के बैर भाव-विरोध को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी चाहिए। और हम दूसरों को भी क्षमा कर सकें, यही भाव मन में रखना चाहिए। यही क्षमावाणी है। इस दौरान भोजपुर विधायक सुरेन्द्र पटवा ने समाज से क्षमावाणी पर्व कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है।क्षमा वीरों की शोभा है। मजबूत लोग ही क्षमा प्रदान करते हैं।आज पूरे विश्व को क्षमा धर्म अपनाने की आवश्यकता है, क्षमा धर्म के पालन से पूरे विश्व में शांति कायम की जा सकती है़। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामजिक लोगो सहित समाज के श्रदालु मौजूद रहे।
उत्कृष्ठ साधको को किया सम्मनित
मुनि व्यवस्था समिति के अध्यक्ष विनोद जैन आरएनजी ने बताया कि क्षमावाणी के कार्यक्रम में पर्यूषण महापर्व के दौरान तपस्या करने वाले श्रावक प्रिया व श्रेया जैन तथा जिया जैन द्वारा 10 उपवास, महावीर जैन द्वारा छह उपवास, अर्पित जैन द्वारा 5 उपवास, अंकाक्षा जैन, अग्रज जैन द्वारा तीन उपवास, की तपस्या करने वाले तपस्वियों का स्वागत सम्मान किया गया।