मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरखेडा के बद्री धाम मंदिर पर सप्त दिवसीय भागवत कथा आयोजन हो रहा है। जिसमें लेकर कलश यात्रा निकाली गई थी तो वही को भगवान का जन्म उत्सव मनाया गया तो कथावाचक राकेश महाराज नीनोद एवम महंत श्री श्री 1008 परम दास त्यागी महाराज द्वारा कथा में बताया गया कि गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अहंकार को चकनाचूर कर दिया। कथा व्यास ने बताया श्रीकृष्ण का कहना था इंद्र मेघों का राजा है। पानी बरसाना उनका काम है, इसके लिए उनकी पूजा की जाए आवश्यक नहीं। अनुचित मांगो का विरोध जरूरी है। कथा व्यास ने विस्तार पूर्वक कृष्ण की लीला का वर्णन इस प्रकार किया।

वृंदावनवासी अच्छी फसल के लिए इंद्र देवता की पूजा किया करते थे, और धूमधाम से उत्सव मनाया जाता था। इंद्र को अपनी शक्तियों और पद पर घमंड हो गया। जिसे नष्ट करने के लिए श्रीकृष्ण ने एक लीला रची। श्रीकृष्ण ने नगरवासियों को समझाया कि गोवर्धन पर्वत की उपजाऊ धरती के कारण ही वहां पर घास उगती है, जिसको उनके गाये, बैल, व पशु चरते हैं। जिसके बाद उन्हें उनसे दूध मिलता है, साथ ही वह खेत जोतने में मदद करते हैं। उन्होंने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवेर्धन की पूजा करने को कहा। श्रीकृष्ण की बात मानकर बृजवासियों ने इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू की, जिससे इंद्र कुपित हो गए। वृन्दावन पर मूसलधार बारिश शुरू कर दी। इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए श्री कृष्ण ने अपने बाएं हाथ की कनिष्ठ अंगुली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया।