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रायसेन जिले के बोरास घाट पर मकर सक्रांति के दिन मनाई जाती है शहीद सक्रांति

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आज के दिन विलीनीकरण अन्दोलन में 14 जनवरी को जिले के चार युवाओं ने दी थी शहादत

आजादी के 659 दिन बाद भोपाल में फहराया तिरंगा झण्डा

 रायसेन । भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और रायसेन जिला जो भोपाल नवावी रियाशत का अहम हिस्सा था जो 659 दिन बाद स्वतन्त्र हुआ । सम्पूर्ण भारत में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती हैं लेकिन रायसेन जिले के उदयपुरा के बौरास में शहीदी संक्रांति मनाई जाती हैं।हालांकि कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले में सभी मेलो पर रोक लगा दी है।

जिले के बोरास में बिलिनीकरण आंदोलन हुआ था जिसमे चार राजपूत शहीद हुए थे ।जिन्होंने भारत के ध्वज को गिरने नही दिया था।आज उनकी याद में नर्मदा के किनारे बौरास घाट पर श्र्द्धा सुमन अर्पित कर मनाई जाती हैं मकर संक्राति । प्रतिवर्ष जन प्रतिनिधि एवं स्थानीय लोगो के द्वारा शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाते है बही उनको परिजनों का सम्मान किया जाता है ।यहाँ प्रतिवर्ष पूर्व pwd मंत्री रामपाल सिंह राजपूत, पूर्व जनपद अध्यक्ष सही ग्राम पंचायत कार्यक्रम आयोजित करता हैं।

-देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था, लेकिन आजादी मिलने के 659 दिन बाद 01 जून 1949 को भोपाल में तिरंगा झण्डा फहराया गया। भोपाल रियासत के भारत गणराज्य में विलय में लगभग दो साल का समय इसलिए लगा कि, भोपाल नवाब हमीदुल्ला खॉं इसे स्वतंत्र रियासत के रूप में रखना चाहते थे। साथ हीहैदराबाद निजाम उन्हें पाकिस्तान में विलय के लिए प्रेरित कर रहे थे जो कि भौगोलिक दृष्टि से असंभव था। आजादी के इतने समय बाद भी भोपाल रियासत का विलय न होने से जनता में भारी आक्रोश था जो विलीनीकरण आन्दोलन में परिवर्तित हो गया, जिसने आगे जाकर उग्र रूप ले लिया। जिसमे चार लोगों को सहादत मिली।

-भोपाल रियासत के भारत संघ में विलय के लिए चल रहे विलीनीकरण आन्दोलन की रणनीति और गतिविधियों का मुख्य केन्द्र रायसेन जिला था। रायसेन में ही उद्धवदास मेहता, बालमुकन्द, जमना प्रसाद, लालसिंह ने विलीनिकरण आन्दोलन को चलाने के लिए जनवरी-फरवरी 1948 में प्रजा मंडल की स्थापना की थी। रायसेन के साथ ही सीहोर से भी आन्दोलनकारी गतिविधियॉं चलाई गईं। नवाबी शासन ने आन्दोलन को दबाने का पूरा प्रयास किया। आन्दोलनकारियों पर लाठिया-गोलियां चलवाईं गईं।आज भी वो झंडा मौजूद है जिसे सिर्फ आजतक द्वारा पहली बार दिखाया जा रहा हैं। जिसे झुकने नही दिया और ग्राम बोरास में 4 युवा शहीद हुए। यह चारों शहीद 30 साल से कम उम्र के थे। इनकी उम्र को देखकर उस वक्त युवाओं में देशभक्ति के जज्बे का अनुमान लगाया जा सकता है। शहीद होने वालों में श्री धनसिंह आयु 25 वर्ष, मंगलसिंह 30 वर्ष, विशाल सिंह 25 वर्ष और एक 16 वर्षीय किशोर मा. छोटेलाल शमिल था। इन शहीदों की स्मृति में उदयपुरा तहसील के ग्राम बोरास में नर्मदा तट पर 14 जनवरी 1984 में शहीद स्मारक स्थापित किया गया है। नर्मदा के साथ-साथ बोरास का यह शहीद स्मारक भी उतना ही पावन और श्रृद्धा का केन्द्र है। प्रतिवर्ष यहां 14 जनवरी को विशाल मेला आयोजित होता आ रहा है।हालांकि कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले में सभी मेलो पर रोक लगा दी है।

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