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प्राकृतिक सौंदर्य और झरने बने आकर्षण का केंद्र: पिकनिक मनाने पहुंच रहे लोग

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रिपोर्ट धीरज जॉनसन दमोह

बारिश के मौसम में दमोह जिले के विभिन्न स्थानों में दिखाई देने वाले झरनों के निकट प्रकृति प्रेमी पहुंचने लगे है जिनमें से कुछ तो पहले से ही पिकनिक स्पॉट के रूप में जाने जाते है और कहीं कहीं स्थानीय लोगों को देखा जाता है। जिले के कुछ झरने और पिकनिक स्पॉट को कैमरे में कैद किया गया।

मटककुंड

दमोह – जबलपुर स्टेट हाइवे पर जबेरा से लगभग सात किमी दाहिनी तरफ जंगल और पहाड़ी क्षेत्र के मध्य दिखाई देते झरने को देखने प्रकृति प्रेमी पहुंचने लगे है। विदित है कि इस झरने तक जाने के लिए एक किमी से अधिक जंगल और नाले में यत्र तत्र बिखरे बड़े बड़े पत्थर पेड़ और झाड़ियों के मध्य से गुजरना पड़ता है बारिश के मौसम में करीब चार स्थान पर नाले को पार करना पड़ता है जिसमें पानी रहता है। तीन तरफ से पहाड़ से घिरे और झरने का आनंद लेने के लिए दूर दूर से लोग यहां आते है जहां सूर्य का प्रकाश भी कम समय के लिए रहता है।


निदानकुंड वॉटरफॉल

शहर से लगभग 62 किमी दूर सिग्रामपुर से भैंसाघाट पहाड़ी पर प्राकृतिक वॉटरफॉल पर्यटकों की खास पसंद है जहां जिले के प्रकृति प्रेमियों के अलावा आस पास के अन्य जिलों से काफी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने आते है, करीब 6 किमी पहाड़ी रास्ते को पार करने के बाद जंगल के बीच दिखाई देता यह झरना प्रतिवर्ष आकर्षण का केंद बना रहता है यहां पहाड़ी क्षेत्र से खूबसूरत नजारे भी दिखाई देते है।

 

भिलौनी के निकट खूबसूरत नजारे

जिले के बटियागढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम भिलौनी में किले के निकट इन दिनों खूबसूरत नजारे दिखाई देने लगे है जहां काफी दूर जंगल और वीरान क्षेत्र से चट्टानों और नाले के मध्य से आने वाला पानी झरने के रूप में बदल जाता है उक्त स्थान पर जगह जगह चट्टानो पर भित्तिचित्र भी दिखाई देते है जो इस स्थान की प्राचीनता को स्वयं व्यक्त करते है। जिसे देखने अक्सर लोग यहां पहुंचते है।

बगदरी का वाटरफॉल

जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक अंतर्गत तेंदूखेड़ा से लगभग 12 किमी दूर जबलपुर मार्ग पर दाहिनी तरफ दिखाई देता बगदरी वॉटरफॉल देखने और यहां पिकनिक मनाने काफी लोग पहुंचने लगे है कुछ अंतराल से चट्टानो के मध्य से गिरता पानी झरने के रूप में बदल जाता है जिसके नजारे काफी मनमोहक प्रतीत होते है।

सिलापरी

शहर से करीब 70 किमी दूर रजपुरा के निकट पहाड़ी क्षेत्र और चट्टानो से काफी ऊंचाई से गिरता पानी बहुत ही सुंदर दृश्य उत्पन्न करता है यह अति प्राचीन इलाका भी कहलाता है जहां रॉक पेंटिग्स भी बनी हुई है।

कुम्हारी

शहर से करीब 35 किमी दूर कटनी मार्ग पर बम्हनी – कुम्हारी के निकट जंगल से बहता हुआ पानी झरने के रूप में बदल जाता है जिसे देखने अलग अलग स्थानों से लोग यहां पहुंचते हैं।

किशनगढ़

जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के सेलवाड़ा के निकट किशनगढ़ धाम में दूर तक दिखाई देती पहाड़िया,झरने और जंगल में बीच प्राचीन दीवार और भग्नावशेष आकर्षण का केंद्र रहते है जहां अन्य जिलों से भी लोगों का आना जाना लगा रहता है।

मडियादों

जिले के मडियादों क्षेत्र में भी प्राकृतिक झरने दिखाई देते है जहां धार्मिक स्थल भी है यहां गौ मुख और झाड़ू बब्बा भी शामिल है जहां के झरने को देखने और पिकनिक मनाने अक्सर लोग आते रहते है।

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