दीपक कांकर रायसेन
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के ग्राम सिहोरा में हर साल नाग पंचमी पर नागों की अदालत लगती हे। जहां बकायदा नागो की पेशी होती हे और जज होते हे यहां के पंडा अजब सिंह गुर्जर।यहां दूर दूर से लोग नागो से पीड़ित व्यक्ति को लेकर पहुंचते हे।

मंदिर के पुजारी पंडा अजब सिंह गुर्जर की मौजूदगी में 40 सालों से नागों की अदालत लगाई जा रही हे। इसे धार्मिक आस्था कहें या अंधविश्वास।सीहौरा गाँव में शेषनाग भगवान के दरबार है जहां नाग और नागिन जिस व्यक्ति को काटते हे उन्हे नागपंचमी के दिन यहां लाया जाता हे। बकायदा सांप ले काटे व्यक्ति के शरीर से सांप की आत्मा बोलती हे और बताती हे कि उसने इस व्यक्ति को क्यो काटा था।

पण्डा अजब सिंह गुर्जर ने बताया कि यहां इस परंपरा का आयोजन 40 सालों से जारी है।इंसानों का जहर उतारा जाता है।दरबार की खाशियत यह है कि अदालत में नाग नागिनों की होती है पेशी।सांपों की तरह जमीन पर लेटते हैं सर्पदंश से पीड़ित लोग।जब किसी इंसान को नाग नागिन द्वारा काट लिया जाता है तो श्रीराम रसिया हनुमान जी के दरबार के नाम का कलावा पीड़ित को बाधा कता हे। फिर नागपंचमी की पेशी के बाद उ उतरा कलेवा हाथ में पुनः बांध दिया जाता हे।नागपंचमी पर दरबार में उसकी पेशी होती है।