सुरेंद्र जैन धरसीवा
एक तरफ जहाँ चंद रुपयों में लोग अपना ईमान धर्म खो देते हैं यहां तक कि सौ दो सौ रुपये के लिए हत्या तक कर देते हैं तो वही कुछ गरीब तबके के मेहनतकश लोगो मे ईमानदारी आज भी इतनी जिंदा है कि वह न तो किसी गरीब का झोला उठाकर खुद भागते हैं न किसी ओर को उठाकर भागने देते हैं बल्कि नोटों से भरा झोला पुलिस के माध्यम से संबंधित व्यक्ति तक पहुचा देते हैं…..ऐंसा ही एक मामला धरसींवा में सामने आया जिसमे एक ठेले पर फलफ्रूट बेंचने वाले ने ईमानदारी का परिचय दिया….हुआ यूं कि तिबरैया में मेहनत मजदूरी करने वाली अंबिका साहू पत्नी स्वर्गीय अभयराम साहू ने अपनी मां के पास अपनी खून पसीने की कमाई जोड़कर रखी थी सोमबार को अंबिका परसतराई से अपनी मां से अपनी जमा पूंजी बीस हजार रुपये लेकर सायकिल से वापस जा रही थी तभी तिबरैया अंडरब्रिज के नीचे तनी टूटकर उसका झोला गिर गया लेकिन इस सबसे बेखबर अंबिका अपने घर निकल गई तभी एक वाइक पर दो युवक पहुचे ओर झोला उठाकर जाने लगे जिस पर वहां फलफ्रूट बेंचने वाले गिरधारी भट्ट की नजर पड़ गई और उसने दौड़कर उनसे झोला छीनकर कहा यह मेरे परिचित का है,…हालांकि जब झोला गिरा था उस समय उसका ध्यान उस तरफ नहीं गया था कि किसका गिरा है इसलिए फ्लफ्रुट बिक्रेता ने झोला लाकर धरसींवा थाना में जमा कर दिया…. पुलिस ने झोला देखा तो उसमें बीस हजार रुपये आधार कार्ड व अन्य कागजात रखे थे….पतासाजी कर धरसींवा थाना में पदस्थ जनकलाल बन्दे ने महिला की खोज की ओर बुलाकर फ्लफ्रुट बिक्रेता के हाथों से ही उक्त महिला को उसकी राशि व झोला वापस दिलवाया….फलफ्रूट बिक्रेता की इस ईमानदारी पर पुलिस ने उनकी पीठ थपथपाई ओर जिसने भी उनकी ईमानदारी की खबर सुनी उनकी ईमानदारी पर उन्हें सेल्यूट किया