भोपाल। शहर के श्यामला हिल्स स्थित गांधी भवन में कला शिविर एवं इंटर्नशिप कार्यशाला नौवे दिन भी जारी रही। युवाओं व बच्चों में अनुशासनात्मक जीवन शैली तथा अपनी छुपी हुई प्रतिभा को पहचान कर निखारने के लिए आयोजित की जा रही कार्यशाला के नवमें दिन की शुरुआत योग, ध्यान व प्राणायाम के अभ्यास से हुई। एक्टिंग में स्वर विज्ञान के साथ, कहानी पर अभिनय करने की कला सिखाई गई। फोक डांस में बधाई तथा जुंबा नृत्य का प्रशिक्षण दिया गया। संगीत में जय जगत गीत का सामूहिक अभ्यास हुआ। आर्ट एंड क्राफ्ट तथा पेंटिंग में वस्तु को समझकर कागज पर उतरने की बारीकी का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

गोबर कला प्रशिक्षण का हुआ समापन –
कला शिविर में गोबर कला पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का आज समापन हुआ। इस कला के माध्यम से बच्चों ने शील्ड बनाने उस पर कुमकुम व हल्दी की पेंटिंग करने का अभ्यास किया। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त हुनर से निर्मित शील्ड से शिविरार्थी कला शिविर में पधारे हुए अतिथियों का सम्मान करेंगे। गोबर कला का प्रशिक्षण सुरेश राठौर, प्रदीप और लखन भाई के नेतृत्व में प्राप्त हुआ।

भगवान बुद्ध की जयंती के अवसर पर कला शिविर में विचार गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें गांधी को उपन्यास के सचिव दया राम रामदेव ने भगवान बुद्ध को याद करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध एक चेतना है, जिससे हमें करुणा की सीख मिलती है। आकाश बंजारा ने कहा कि भगवान बुद्ध हमें मानव मात्र में प्रेम करना सिखाते है, उनके जीवन से पता चलता है कि हमें सदैव त्याग वृत्ती पर जोर देना चाहिए, क्योंकि मानवीय जीवन श्रम मूल्यों पर बल देता है। भगवती कड़वे ने भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र को नौजवानों के बीच रखा। मोहन दीक्षित ने भगवान बुद्ध की अहिंसा पर जोर देते हुए कहा कि यह मानव सभ्यता के अस्तित्व की पालक है।

इंटर्नशिप कार्यशाला में नौजवानों ने आज कार्यक्रम के संयोजन, आयोजन के तरीकों पर संवाद स्थापित किया। इन कार्यक्रमों के द्वारा लोगों को कैसे जोड़ा जाता है, समाज में उससे क्या प्रभाव पड़ता है तथा समाज में रचनात्मक और सामूहिक नेतृत्व कैसे विकसित हो? इन सारे विषयों पर परिचर्चा रखी गई। उन मुद्दों पर भी विचार किया जो समाज की लोकतांत्रिक कार्य पद्धति के लिए आवश्यक है। आकाश बंजारा ने कबीर गीत परंपरा पर बात रखते हुए कहा कि यह परंपरा हमें प्रकृति के साथ-साथ आदिम सभ्यता से जोड़ती है जिससे हमारी तार्किकता का विकास होता है और चिंतन शक्ति में वृद्धि होती है। मोहन दीक्षित ने कहा कि जनगीत सामाजिक आंदोलन का अभिन्न अंग है। इसी के माध्यम से हम अपने सामाजिक नागरिक संगठनों की पहल तथा उनके उद्देश्यों को लोगों तक पहुंचा पाते हैं। उन्होंने कहा कि बिना जन गीत के हम समाज को जागरूक नहीं बना सकते और ना ही आंदोलन सफल हो सकते हैं।

इंटर्नशिप कार्यशाला का कोऑर्डिनेशन भगवती कड़वे तथा अध्यक्षता आरती धुर्वे ने की। इशिका राठौर, शिवानी निक्कम, रश्मि शर्मा, सुमन, गीता, पूजा, शिवाशीष, अनुपम नामदेव, विवेक तिवारी, अंकित मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किये।

योग, प्राणायाम का प्रशिक्षण अभिषेक अज्ञानी, एक्टिंग का प्रशिक्षण कुलदीप रघुवंशी, आर्ट क्राफ्ट, पेंटिंग व गेम्स का प्रशिक्षण पूजा बिष्ट, गीता, रश्मी व सुमन, डांस का प्रशिक्षण भगवती कड़वे, इशिका राठौर, मदीहा बेग, संगीत का प्रशिक्षण हर्षित तिवारी, गोबर कला व क्ले आर्ट का प्रशिक्षण सुरेश भाई, प्रदीप और लखन ने दिया।
न्यूज़ सोर्स- दयाराम नामदेव सचिव गांधी भवन न्यास भोपाल