कवर्धा। श्रीरामकिंकर विचार मिशन के अध्यक्ष स्वामी मैथिलीशरण ने दो दिन में कवर्धा के अनेकों स्थानों पर प्रवचन किए। उन्होंने शहर अभ्युदय विद्यालय पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने कहा कि जीवन में संगीत, ग्रंथ और माला तीनों को माता सरस्वती ने अपना उपादान बनाया। वाणी का तात्पर्य है संगीत, माला का ईश्वर और ग्रंथ का तात्पर्य वेद है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको संतुलित रहना है। जीवन को स्वतंत्रता और परतंत्रता के मध्य रहना चाहिए। किसी भी गुण का अतिरेक अवगुण हो सकता है। आप सब देश के भविष्य हो। आप देश की वह पूजित मूर्ति हो जो अभी कच्ची मिट्टी है। हमें तुम्हारे ऊपर विश्वास है। तुम सब हमारे विश्वास के आश्रय हो। तुम्हीं में गणेश हैं, तुम्हीं में हनुमान, लक्ष्मण और भरत छिपे हैं, जो रामराज्य बनाएंगे। तुम सब देश के भविष्य हो।
‘सा विद्या या विमुक्तये’ को परिभाषित करते हुए स्वामी मैथिलीशरण ने कहा बच्चे विद्यालय में इसलिए पढ़ने आते हैं ताकि उनको यह ज्ञान हो कि अभी कितना पढ़ना शेष है, यही शिक्षा और ईश्वर की अनंतता है कि व्यक्ति को यह लगता रहे कि जो हमने किया है उससे भी ऊपर कुछ और है। इसी को पुरुषार्थ और कृपा कहते हैं। पुरुषार्थ उपलब्धि विषयक है और कृपा- पुरुषार्थ। फल को भगवान की कृपा का अनुभव करने के लिए होता है।
विद्यालय की प्राचार्य शोभा ने अंत में धन्यबाद देते हुए कहा कि स्वामीजी के अप्रायोजित कार्यक्रम को मैं हनुमानजी की कृपा के रूप में देखती हूं। हनुमानजी के बिना भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा संभव नहीं है। भक्त के बिना भगवान नहीं। भगवान के बिना भक्त नहीं। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन अभिषेक सिंह, अपर सत्र न्यायाधीश उदय लक्ष्मी सिंह परमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिका और विद्यार्थी उपस्थित थे।