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विधानसभा चुनाव आने के पूर्व भाजपा से पलायन क़ा दौर शुरू

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देवेन्द्र तिवारी सांची रायसेन

जैसे जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे भाजपा में भगदड़ मचने का सिलसिला चल पड़ा है तथा भाजपा से नेताओं कार्यकर्ताओं का मोहभंग हो रहा है तथा नेता कार्यकर्ता कांग्रेस का दामन थाम रहे हैं जो नगर में भी चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार लगातार भाजपा से नेता कार्यकर्ताओं का मोहभंग हो रहा है तथा भाजपा नेता कार्यकर्ता लगातार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को को अलविदा कहते हुए कांग्रेस का दामन थामने की खबरें लगातार देखने सुनने को मिल रही है ऐसा नहीं है कि सांची विधानसभा क्षेत्र इस भगदड़ से अछूता है इस क्षेत्र से भी लगातार नेता कार्यकर्ता कांग्रेस के संपर्क में बने हुए हैं ।जब विगत साढ़े तीन साल पहले जब कांग्रेस सरकार के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामा था तब उनके समर्थन में इस क्षेत्र के विधायक तथा कमलनाथ सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभूराम चौधरी भी सिंधिया के समर्थन में बीजेपी में शामिल हो गए थे तब डॉ चौधरी के हजारों समर्थकों ने भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था तब कांग्रेस में सूना पन आ गया था जो कांग्रेस कार्यकर्ता बचे थे उन चुनिंदा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को खड़ा करने का बीड़ा उठाया इस दौरान डॉ चौधरी के समर्थकों ने भी भाजपा के कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया था जिससे भाजपा में तब से ही उपेक्षित रवैये के चलते नाराजगी बढ़ गई थी तब इस उपेक्षित नीति का शिकार नगर के भाजपा कार्यकर्ताओं में भी दिखाई दिया था यह नाराजगी तब और बढ़ गई जब नगर परिषद के चुनाव हुए तथा इस चुनाव में भाजपा ने लगभग 11 पार्षद पदों पर जीत दर्ज की एवं बताया जाता है तीन निर्दलीय पार्षद भाजपा समर्थक ही जीतकर आए । जबकि इस ऐतिहासिक स्थली की निर्वाचित परिषद में कांग्रेस के एक ही पार्षद मिल सका तब भाजपा की परिषद में बल्ले-बल्ले हो गई तब अध्यक्ष पद पर पूर्व अध्यक्ष तथा वार्ड नं 1 से निर्वाचित बलराम मालवीय को पार्टी ने नामांकित किया परन्तु कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए तथा डॉ चौधरी के करीबी पप्पू रेवाराम ने पार्टी की गाइड लाइन को दरकिनार करते हुए अध्यक्ष चुनाव में भाग लिया तब बराबर मतों के कारण पर्ची नीति से डा चौधरी के समर्थक श्री रेवाराम ने अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष पद पर नामांकित पार्षद को हराकर अध्यक्ष पद हथिया लिया तब से नगर की भाजपा में खाई और गहरा गई तब कांग्रेस के एक मात्र पार्षद ने भी पारिवारिक सदस्य होने के नाते श्री रेवाराम का समर्थन किया था तथा कांग्रेस पार्षद को परिषद पीआईसी में शामिल कर लिया गया । इस अध्यक्ष पद के चुनाव में खरीद-फरोख्त भी खूब चर्चित हुई बावजूद इसके कुछ दिन पूर्व ही कांग्रेस पार्षद ने भी आरोप लगाते हुए नगर में एक कांग्रेस के नेतृत्व में रैली निकाली तथा अपने ही पारिवारिक सदस्य अध्यक्ष के विरुद्ध तानाशाही एवं उपेक्षा के चलते नारेबाजी कर डाली जो नगर में खूब चर्चित हुई ।तब से ही भाजपा दो धड़ों में बंटी दिखाई देने लगी तथा नगर का विकास भी ठप्प पड़ कर रह गया अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही नगर के भाजपा कार्यकर्ताओं की भी पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं अब देखना है नगर के भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी से उपेक्षित होकर कांग्रेस का दामन थामने कब सामने आ सकेंगे ।

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