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धर्म कर्म के सामने साइंस भी साइलेंस हो जाता है छत्तीसगढ़ के चन्द्रगिरि डोंगरगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी के अनमोल वचन

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सुरेन्द्र जैन धरसीवा

छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ चन्द्रगिरि तीर्थ क्षेत्र में विराजमान परम पूज्य संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने रविवार को अपने अनमोल वचन में कहा कि वर्तमान में व्यक्ति का भाव संस्कार कि अपेक्षा से निचे कि ओर जा रहा है ऊपर से उसे बहुत कुछ दिया तो जाता है जिसका असर ऊपर – ऊपर देखने को मिलता है परन्तु अन्दर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है । भाव जो है वो अन्दर का विषय है जिस पर बाहर के निमित्त आदि का कोई असर नहीं पड़ता है । आज कि जो शिक्षा पद्धति है वह केवल बाहरी विकास के लिये कार्य कर रही है अन्दर से संस्कार आदि देने का कार्य कहीं भी देखने को नहीं मिलता है । कुछ लोग अपने बच्चे को लेकर आते हैं और कहते हैं महाराज बच्चे को आशीर्वाद दे दो ताकि उसका भविष्य उज्जवल हो सके । आप लोग उन्नीसवी शताब्दी, बीसवी, इकीस्वी, बाईसवी शताब्दी को पार कर चुके हैं और अब वह बालक तेईसवी शताब्दी का यदि धर्म कर्म के लिये आ रहा है मतलब इसका पुण्य है तभी यहाँ तक आया है और यह शुभ चिन्ह भी है । अन्दर के भाव के लिये संस्कार देना आवश्यक है । धर्म का अर्थ आस्था, श्रद्धान, भक्ति है और कर्म का अर्थ इसी के अनुरूप आचरण करना है । आज कि भाषा में इसी को धर्म कर्म बोलते हैं | कर्म के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं है पर इसके लिये भी भाव लगाना आवश्यक होता है। बहुत तीव्र गति से काल चक्र घूम रहा है परन्तु जैन धर्म के सिद्धांत अनुसार काल चक्र घूमता नहीं है जबकि मनुष्य का मस्तिष्क बहुत तीव्र गति से घूम रहा है जिसकी वजह से यह घुमाव ज्यादा है । बच्चे इससे एक प्रतिशत भी नहीं मान रहे हैं । मै मानता हूँ इस उम्र में हमारी क्या दशा थी । आज बाहर तो बहुत परिवर्तन हो रहा है परन्तु भीतर कुछ भी परिवर्तन नहीं हो रहा है ।

एक पुरानी कहावत है कि बाहर वाला पासा फेके, ऊपर वाला पासा फेके और निचे चलते दांव । अर्थ कि दृष्टी से इसमें कुछ परिवर्तन आवश्यक है – भीतर वाला पासा फेके, बाहर चलते दांव । समय के हिसाब से किसी भी चीज का सुधार आवश्यक है परन्तु वह सुव्यवस्थित होना चाहिये । भीतर के भाव को गौण मत करो वह कुछ नहीं है ऐसा मत सोचो । बाहर जो कुछ है वह कार्य नहीं देने वाला है परन्तु भीतर जो है वही सब कुछ देने वाला है । एक व्यक्ति को 3 – 4 दिन पूर्व तीव्र वेदना होने लगती है और वह उसे सहन करता रहता है परन्तु फिर उसकी वेदना असहनीय हो जाती है धैर्य का बाण टूटने लगता है तो वह बेहोश सा हो जाता है फिर आप वैद्य को बुलाओ, डॉक्टर को बुलाओ या दोनों को साथ में बुलाओ तो और अच्छा है परन्तु जब कुछ नहीं होता तो फिर उपचार कि दृष्टी से शितोप्चार किया जाता है – उस स्थान पर दूध, मलाई और बर्फ कि डल्ली रखते है तो वह आधे मिनट के अन्दर होश में आ जाता है और ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ बोलने लगता है । यह उसके भीतर के संस्कार ऐसे हैं जिसकी वजह से वह ऐसी स्थिति में भी ॐ का उच्चारण अन्दर ही अन्दर कर रहा था | अभी उसका आयु कर्म पूरा नहीं हुआ था, उसके जीवन का पेट्रोल अभी शेष था । धर्म कर्म के सामने साइंस भी साइलेंस हो जाता है । विश्व भी आज इसी ओर देख रहा है । बाहर वाला फैल हो सकता है किन्तु अन्दर वाला कभी भी अनुतीर्ण नहीं हो सकता । कल एक लड़का आया वह युवा था उसके दोनों पैर जाम हो गए थे उसको व्हील चेयर पर उसके परिजन लेकर आये थे महाराज जी आशीर्वाद देदो इसकी ऐसी स्थिति हो गयी है । कोई बात नहीं आप बोल रहे हो यही पर्याप्त है। विश्व के सभी डॉक्टरों ने कह दिया कि इसके लिये कोई इलाज नहीं है सभी ने हाँथ उठा दिया है कि इसका इलाज संभव नहीं है आप ही कुछ कीजिये जिससे यह ठीक हो जाये । हमने कहा जब सभी डॉक्टरों ने कह दिया है तो हमें कैसे पूछ रहे हो तो उसने कहा आप सब कुछ कर सकते हो । ऐसे संस्कार डाले हैं उनके घर वालों ने तभी ऐसा बोल रहा है ।ऐसे रोगी के केश आज – कल बहुत आ रहे हैं हमारे पास जिनको बाद में कोई नहीं मिलता है । ठीक है हमने सोचा यहाँ तक आया है तो इसका कुछ पुण्य तो होगा जो इसको यहाँ लाया है इसमें मैं क्या कर सकता हूँ बस हमें उसके पुण्य को उपयोग में लाना है |
हमने उनसे कहा कि आप आज से रात्रि में चारो प्रकार के आहार का त्याग करदो |

सूर्यास्त के बाद कुछ भी ग्रहण न करना रामबाण का काम करता है
परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने अनमोल वचन में आगे कहा कि सूर्य अस्त के बाद कुछ भी नहीं खाना है | यह राम बाण है | राम बाण समझते हैं ना आप लोग जिसको कोई विफल नहीं कर सकता, जो अचूक होता है, जिसको कोई हरा नहीं सकता वह अमोक होता है | यह औषध से भी बढ़कर औषध का कार्य करेगा | कोई कुछ भी कहे सुन लेना लेकिन रात्रि में नहीं खाना | अब उसका एलोपैथी में ईलाज संभव नहीं हुआ तो वह आयुर्वेदिक उपचार कि ओर जा रहा है | इसमें भी आपको शाकाहारी औषधि ही उपयोग में लेना है | चाहे कुछ भी हो जाये आपको चाहे दवाई भी रात्रि में खाने को बोले तो नहीं खाना | जो भी औषधि आदि आप लेंगे तो दिन में ही लेना है रात्रि में नहीं |

….तो वह समझ जायेंगे कि इस बाबा ने उस बाबा के पास भेजा है
अचार्यश्री ने कहा आप यदि रामदेव बाबा से या किसी से भी आयुर्वेदिक उपचार करवाते हैं तो उन्हें भी कह देना कि ये बाबा ने रात्रि में कुछ भी लेने के लिये मना किया है | तो वह समझ जायेंगे कि इस बाबा ने उस बाबा के पास भेजा है |
आचार्यश्री ने आगे कहा कि रात्रि में कुछ नहीं लेना भी औषध का काम करता है | इसी प्रकार हिंसा नहीं करना ही अहिंसा है, असत्य नहीं कहना ही सत्य है, चोरी नहीं करना और किसी कि वस्तु आदि को बिना पूछे नहीं लेना ही अचौर्य है, कुशील कि ओर नज़र नहीं रखना ही शील व्रत है और परिग्रह आदि किसी का छिना झपटी नहीं करना ही अपरिग्रह है | यह सारे के सारे मन्त्र विधि परख नहीं किन्तु निषेध परख है | हम इसे निषेधात्मक तरीके से भी समझ सकते है | जब भी हम कोई नियम अन्दर से अंतर्मन लेते हैं तो वह उसी समय से पुण्य बंध शुरू कर देता है और वह ऐसे फलीभूत होता है कि जिसकी कोई सीमा ही नहीं है | धर्म कर्म के लिये आप लोग समय देते हैं यह अच्छा है और बाहर के कार्य के लिये भी समय देते है जो आवश्यक है लेकिन धर्म कर्म के लिये जितना समय दो उतना अच्छा रहेगा |

*रविवार को आहार दान का इन्हें मिला पुण्य*
रविवार को आचार्य श्री को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य प्रतिभास्थली कि ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, रचना दीदी परिवार को प्राप्त हुआ जिसके लिए चंद्रगिरी ट्रस्ट के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन,सुभाष चन्द जैन, चंद्रकांत जैन, निखिल जैन (ट्रस्टी),निशांत जैन (सोनू), प्रतिभास्थली के अध्यक्ष श्री प्रकाश जैन (पप्पू भैया), श्री सप्रेम जैन (संयुक्त मंत्री) ने बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें दी|

*तीर्थ क्षेत्र में मन्दिर जी का निर्माण जारी*
श्री दिगम्बर जैन चंद्रगिरी अतिशय तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन ने बताया की क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है और यहाँ प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में कक्षा चौथी से बारहवीं तक CBSE पाठ्यक्रम में विद्यालय संचालित है और इस वर्ष से कक्षा एक से पांचवी तक डे स्कूल भी संचालित हो चुका है | यहाँ गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है जिसका शुद्ध और सात्विक दूध और घी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है |

*हथकरघा से मिल रहा जरूरतमंदों को रोजगार*
आचार्यश्री के आशीर्वाद से चन्द्रगिरि तीर्थ में हथकरघा का संचालन भी वृहद रूप से किया जा रहा है जिससे जरुरत मंद लोगो को रोजगार मिल रहा है और यहाँ बनने वाले वस्त्रों की डिमांड दिन ब दिन बढती जा रही है | यहाँ वस्त्रों को पूर्ण रूप से अहिंसक पद्धति से बनाया जाता है जिसका वैज्ञानिक दृष्टि से उपयोग कर्त्ता को बहुत लाभ होता है|आचर्य श्री के दर्शन के लिए दूर – दूर से उनके भक्त आ रहे है उनके रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है | कृपया आने के पूर्व इसकी जानकारी कार्यालय में देवे जिससे सभी भक्तो के लिए सभी प्रकार की व्यवस्था कराइ जा सके |

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