सरकार को समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में किसानों की रुचि नहीं, किसान बोले- पहले बढ़ाओ समर्थन मूल्य, तब देंगे गेहूं
– बाजार में गेहूं का दाम ज्यादा इसलिए किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं नहीं बेचना चाहता
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
शिवपुरी जिले में इस साल गेहूं का अच्छा उत्पादन हुआ है लेकिन वहीं दूसरी ओर किसान समर्थन मूल्य पर सरकार को अपना गेहूं बेचना नहीं चाहता है। यही कारण है कि जिले में समर्थन मूल्य पर इस बार मात्र 20 प्रतिशत पंजीयन हुआ है। बीते वर्षो के मुकाबले इस बार किसानों ने कम पंजीयन कराया है। किसानों का कहना है कि बाजार में गेहूं के दाम ज्यादा मिल रहे हैं इसलिए वह अपना गेहूं सरकार को बेचना नहीं चाहते हैं। किसानों का कहना है कि सरकार को समर्थन मूल्य पर गेहूं के रेट जो 2125 रुपए हैं उसे बढ़ाने चाहिए क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ गई है। बाजार में गेहूं के दाम इस समय अधिक है और समर्थन मूल्य कम है। किसानों का कहना है कि इस सरकार के रेट कम होने से हम बाजार में खुले में व्यापारियों को अपना माल बेचेंगे। वैसे देखा जाए तो इस समय बाजार में व्यापारी सामान्य तौर पर किसानों से 2600 रुपए के आसपास गेहूं खरीद रहे हैं।
सरकारी खरीदी कम होने के आसार-
शिवपुरी जिले में पिछले साल बाजार में गेहूं का भाव समर्थन मूल्य से ज्यादा रहने से सरकारी खरीदी मामूली रही। इस साल फिर से यही हालात नजर आ रहे हैं। ऐसे में इस साल सरकारी खरीदी प्रभावित रहेगी। समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए किसानों ने बहुत कम रुचि ली है। इस साल फिर से समर्थन मूल्य खरीदी प्रभावित रहने के आसार नजर आ रहे हैं।

सरकार बार-बार बढ़ रही है पंजीयन की तारीख-
सरकारी खरीदी प्रभावित होने की आशंका अधिकारियों को भी है इसलिए बार-बार पंजीयन की तारीख बढ़ाई जा रही है। शिवराज सरकार ने अभी एक दिन पहले ही पंजीयन की तारीख बढ़ाकर 24 मार्च कर दी। बताया गया है कि ओला वृष्टि से फसलें प्रभावित हुई हैं इसलिए किसानों को राहत देने के लिए गेंहू पंजीयन की तारीख बढ़ा दी है। जबकि किसानों ने पंजीयन के प्रति शुरू से ही उदासीनता दिखाई है। कारण इसके सरकारी भाव हैं। शिवपुरी जिले में 6 फरवरी से पंजीयन प्रारंभ हुए और 20 फरवरी तक गेहूं के लिए 1258 पंजीयन हो सके। लेकिन 21 फरवरी से 10 मार्च तक कुल 12 हजार 803 पंजीयन हो गए थे। इससे साफ हो रहा है कि किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज सरकार को बेचने के में मूड नहीं है। क्योंकि बाजार में खुले में व्यापारी अधिक रेट में गेहूं खरीद रहे हैं।
सरकारी गोदाम रह सकते हैं खाली-
बताया जा रहा है कि इस बार गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रभावित रही तो सरकार के गोदाम खाली रह सकते हैं। आने वाले समय में सरकार को राशन आदि वितरण के लिए नई रणनीति बनानी होगी। वैसे देखा जाए तो विश्व स्तर पर रूस व यूक्रेन युद्ध के बाद से गेहूं के दामों में भारी वृद्धि हुई है। भारत को इसके निर्यात पर रोक लगानी पड़ीं। वहीं पडौसी देश पाकिस्तान में तो गेहूं व आटे के लिए मारामारी हो रही है। कुल मिलाकर शिवपुरी के किसानों का कहना है कि सरकार को समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए।