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साधक के जीवन का सबसे बड़ा दिन होता है दीक्षा दिवस : मुनिश्री सुप्रभसागर जी महाराज

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आचार्य शांतिसागर जी महाराज महोत्सव में मनाया गया मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज का दीक्षा उत्सव

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

धर्म के मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक मनुष्य के जीवन में वह दिन सबसे बड़ा होता है जब उसका दीक्षा दिवस होता है, आज हम आचार्य श्रीशांतिसागर जी महाराज का व्यक्तित्व परिचर्चा कार्यक्रम मना रहे है जिसमें यह बड़ा संयोग है कि शिवपुरी में ही चार्तुमास कर रहे मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज का 7वां दीक्षा दिवस भी आज ही है, इस पावन अवसर पर मुनिश्री के परिजन, स्नेहीजन एवं मित्र आदि का शामिल होना भी मुनिश्रीदर्शितसागर जी महाराज के जीवन का सबसे बड़ा दिन है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में इस दिन को सदैव स्मरणीय बनाना चाहता है। दीक्षा विषय को लेकर उक्त आर्शीवचन दिए श्री दिगम्बर जैन मंदिर में चार्तुमास कर रहे प.पू.मुनिश्री सुप्रभगसार जी महाराज ने जो इन दिनों मनाए जा रहे आचार्य श्रीशांतिसागर जी महाराज के व्यक्त्तित्व परिचर्चा कार्यक्रम के दौरान चार्तुमास में शामिल मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज के दीक्षा दिवस पर समस्त जैन समाज को धर्मलाभ से लाभान्वित करा रहे थे। यहां श्री दिगम्बर जैन समाज के विभिन्न जिनालयों के पदाधिकारी व महिला संगठनों एवं युवा संगठनों के द्वारा मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस गुरू उपकार दिवस के रूप में मनाया गया। मुनिश्री दर्शित सागर जी महाराज ने धर्मसभा में बोलते हुए कहा कि आज में जो कुछ भी हूँ वह अपने गुरु के कारण हूँ, में आज जिस स्थान पर बैठा हूँ वह मेरे गुरु की देन है जिन्होंने मुझे परखकर दीक्षा दी और मेरा जीवन धन्य कर दिया, धर्मसभा में बोलते हुए मुनिश्री दर्शित सागर जी महाराज ने मनुष्य के जीवन मे गुरु के महत्व और दीक्षा के महत्व को बताया। कार्यक्रम की शुरूआत मंगलाचरण से हुई तत्पश्चात आचार्यश्री शांतिसागर जी महाराज एवं मुनिश्री दर्शित सागर जी महाराज के जीवन से ओतप्रोत चित्र का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में शामिल मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज के परिजनों का बहुमान श्री दिगम्बर जैन समाज के द्वारा किया गया। यहां दोनो मुनिश्री के परिजनों के द्वारा ही मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज एवं मुनिश्री सुप्रभसागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन किए गए साथ ही यहां दोनों ही मुनिश्री के प्रति समर्पण भाव से दीक्षा दिवस को गुरू उपकार दिवस के रूप में मनाते हुए श्रद्धा और भक्तिभाव से लाभार्थी नरेश कुमार, अर्जित कुमार परिवार द्वारा दोनों मुनियों के लिए स्फुटिक मणि की माला एवं संयम का उपकार रूपी कमण्डलु भेंट कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। साथ ही यहां मुनिश्री दर्शितसागर जी महाराज के परिजनों में श्रेयांश भैया के द्वारा पुनार्यजन स्वरूप राशि 11 हजार रुपये दान की गई। इसके साथ ही यहां मुनिश्री के दीक्षा कार्यक्रम में शामिल परिजनों एवं लाभार्थी परिवार ने विनयांजलि स्वरूप उपहार देते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा पारस महिला मंडल की ओर से भी उपहार दिया गया। श्रीदिगम्बर जैन समाज की सभी जिनालय की कमेटी के प्रमुखों द्वारा सामूहिक रूप से अर्ध समर्पण किया गया। शास्त्रदान-पाठशाला की बहिन, बेटियो सहित अन्य महिला संस्थाओं पारस महिला मंडल, हैप्पी ग्रुप व अन्य के द्वारा भेंट किया गया।

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