मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर महिलाओं ने दी भावपूर्ण विदाई, 51 वर्षों की परंपरा आस्था और संस्कृति का प्रतीक
सुनील सोन्हिया एवं अभिषेक पाराशर की रिपोर्ट
भोपाल। राजधानी भोपाल के टीटी नगर स्थित कालीबाड़ी में विजयादशमी के अवसर पर बंगाली समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और भक्तिभाव के साथ सिंदूर खेला उत्सव मनाया। इस दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद विवाहित महिलाओं ने मां को सिंदूर अर्पित कर उनकी विदाई की। इसके पश्चात महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूरे परिसर में भक्ति, उत्साह और उल्लास का वातावरण रहा।
पारंपरिक वेशभूषा में डॉक्टर मोनिका, शिप्रा, डॉ हेतल एवं ज्योति ने निभाई रस्म
टीटी नगर कालीबाड़ी में आयोजित सिंदूर खेला के दौरान बड़ी संख्या में बंगाली समाज के परिवारों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। लाल और सफेद रंग की पारंपरिक साड़ियों में सजी महिलाओं ने सबसे पहले मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद एक-दूसरे के माथे और गालों पर सिंदूर लगाकर मंगलकामनाएं कीं।
पारंपरिक ढाक की धुन और धार्मिक जयकारों के बीच महिलाओं ने मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई दी। मां की विदाई के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने अगले वर्ष मां दुर्गा के पुनः आगमन की प्रार्थना की। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ बंगाली समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
क्या है सिंदूर खेला की परंपरा?
सिंदूर खेला बंगाली समाज की प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। दुर्गा पूजा के अंतिम दिन विजयादशमी पर विवाहित महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर इस रस्म की शुरुआत करती हैं। इसके बाद वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुखी वैवाहिक जीवन, अखंड सौभाग्य और परिवार की मंगलकामना करती हैं।
परंपरा के अनुसार, महिलाएं पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों का स्पर्श कर उनके मस्तक और मांग में सिंदूर अर्पित करती हैं। यह रस्म मां दुर्गा की विदाई से जुड़ी भावनाओं, पारिवारिक सुख-समृद्धि और अगले वर्ष उनके पुनः आगमन की उम्मीद का प्रतीक मानी जाती है।

आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है कालीबाड़ी
टीटी नगर कालीबाड़ी भोपाल में बंगाली समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है। यहां दुर्गा पूजा और मां काली की आराधना के आयोजन समाज को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं।
कालीबाड़ी से जुड़ी 51 वर्षों की परंपरा समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। सिंदूर खेला के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं ने शामिल होकर मां दुर्गा एवं मां काली का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर भोपाल में बंगाल की संस्कृति, परंपरा और भक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला।