सुग्रीव-बाली युद्ध, बाली वध और लंका दहन का हुआ जीवंत मंचन, सेमरा में लक्ष्मण को शक्ति लगने और संजीवनी बूटी लाने की लीला ने मोहा मन, देर रात तक उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के ग्राम अंबाडी और सेमरा में आयोजित रामलीला में इन दिनों भक्ति और उत्साह का माहौल है। श्री गणेश चौक सदर बाजार अंबाडी और रेलवे स्टेशन दीवानगंज सेमरा में कलाकारों द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन किया जा रहा है। कहीं भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता, बाली वध और हनुमान जी द्वारा रावण की स्वर्ण लंका जलाने के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित किया, तो कहीं लक्ष्मण को शक्ति लगने, हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाने और कुंभकर्ण वध की लीला ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। रामलीला के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा। देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंचन देखने के लिए जुटे रहे।
सुग्रीव-बाली युद्ध और लंका दहन ने मोहा मन
अंबाडी में रामलीला की शुरुआत भगवान श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा वन में माता सीता की खोज के प्रसंग से हुई। इस दौरान हनुमान जी दोनों भाइयों को सुग्रीव के पास ले जाते हैं। यहां अग्नि को साक्षी मानकर भगवान श्रीराम और सुग्रीव एक-दूसरे का साथ निभाने का वचन देते हैं। इसके बाद सुग्रीव अपने भाई बाली के अत्याचारों की जानकारी भगवान श्रीराम को देते हैं। श्रीराम की सहायता से सुग्रीव बाली को युद्ध के लिए ललकारते हैं। दोनों भाइयों के बीच भीषण युद्ध होता है और अंत में भगवान श्रीराम बाली का वध कर देते हैं।

इसके बाद माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी को लंका भेजा जाता है। भगवान श्रीराम अपनी मुद्रिका देकर उन्हें माता सीता तक संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। हनुमान जी समुद्र पार कर लंका पहुंचते हैं और अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन कर उन्हें श्रीराम की मुद्रिका देते हैं। इसके बाद अशोक वाटिका उजाड़ने और अक्षय कुमार के वध का प्रसंग मंचित किया जाता है।
हनुमान जी ने आग के हवाले की रावण की स्वर्ण लंका
रामलीला का सबसे रोमांचक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मेघनाद हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार में ले जाता है। रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जाती है। इसके बाद हनुमान जी जलती हुई पूंछ से लंका में जगह-जगह आग लगा देते हैं। देखते ही देखते रावण की स्वर्ण लंका आग की लपटों से घिर जाती है।
लंका दहन के इस दृश्य को कलाकारों ने आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। मंच पर आग की लपटों और हनुमान जी के पराक्रम का दृश्य देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारे लगाए। कलाकारों के सजीव अभिनय ने देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा।
सेमरा में लक्ष्मण को शक्ति लगने और संजीवनी बूटी की लीला
वहीं, एक दिन पहले रेलवे स्टेशन दीवानगंज सेमरा में आयोजित रामलीला में अंगद द्वारा रावण को समझाने और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के प्रसंग का मंचन किया गया। इसके बावजूद रावण के नहीं मानने पर युद्ध शुरू हो जाता है। युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी को शक्ति लग जाती है, जिससे रामदल में शोक छा जाता है। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए जाते हैं, लेकिन बूटी की पहचान नहीं होने पर पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं। वैद्य सुषेण के उपचार से लक्ष्मण जी फिर से स्वस्थ हो जाते हैं।
इसके बाद युद्ध दोबारा शुरू होता है। रावण की ओर से कुंभकर्ण युद्धभूमि में पहुंचकर वानर सेना को तितर-बितर कर देता है। यह देखकर भगवान श्रीराम तीक्ष्ण बाणों से कुंभकर्ण का वध कर देते हैं। कुंभकर्ण का सिर रावण के सामने जा गिरता है, जिसे देखकर रावण व्याकुल हो उठता है। इन दृश्यों का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया।
आसपास के गांवों से पहुंच रहे श्रद्धालु
अंबाडी और सेमरा में आयोजित रामलीला देखने के लिए दीवानगंज, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, सरार, कयामपुर, संग्रामपुर, करैया, गीदगढ़, सत्ती, टोला, बालमपुर और देहरी सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच रहे हैं। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, सत्य और धर्म की महत्ता तथा अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जा रहा है। ग्रामीणों में रामलीला को लेकर खासा उत्साह है और प्रतिदिन देर रात तक श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने के लिए मौजूद रहते हैं।