किसानों की सिंचाई और आम जनता के पेयजल को प्राथमिकता देने की मांग, जल आवंटन का हिसाब सार्वजनिक करने पर जोर
सुरेंद्र जैन धरसीवां रायपुर
धरसींवा की पूर्व विधायक अनिता योगेन्द्र शर्मा ने रायखेड़ा, गैतरा और चिचोली स्थित अडानी पावर के रायपुर ताप विद्युत संयंत्र के प्रस्तावित विस्तार पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संयंत्र के विस्तार से पानी की मांग बढ़ेगी, जिससे समोदा और कोडार जलाशयों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में राज्य सरकार को औद्योगिक जरूरतों के साथ किसानों की सिंचाई, ग्रामीणों की निस्तारी और आम जनता के पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
श्रीमती शर्मा ने कहा कि जल आवंटन से पहले जलाशयों में उपलब्ध पानी, सिंचाई की जरूरतों, पहले से निर्धारित जल उपयोग और गर्मी व कम वर्षा वाले महीनों में संभावित मांग का समग्र आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से दोनों जलाशयों के जल आवंटन आदेश, उपलब्धता के आंकड़े, पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों और जल प्रबंधन योजनाओं को सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जल संसाधनों का उपयोग करते समय पेयजल और कृषि संबंधी जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन इसके कारण किसानों की फसल और ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित नहीं होनी चाहिए। कम वर्षा या सूखे की स्थिति में जल संकट से निपटने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं, जिनके तहत पेयजल और सिंचाई की सुरक्षा सुनिश्चित हो तथा जरूरत पड़ने पर औद्योगिक जलापूर्ति में कटौती का आधार तय हो।
पूर्व विधायक ने समोदा और कोडार जलाशयों की वास्तविक जल उपलब्धता, सिंचाई एवं पेयजल की मांग और प्रस्तावित संयंत्र विस्तार के लिए आवश्यक पानी का संयुक्त जल-संतुलन आकलन सार्वजनिक करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रभावित किसानों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय नागरिकों को पूरी जानकारी देने के साथ निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने औद्योगिक जल खपत कम करने के लिए उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग, जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने और पानी की खपत की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया। शर्मा ने कहा कि संबंधित विभाग संयुक्त समीक्षा कर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रस्तावित विस्तार से किसानों, ग्रामीणों और आम जनता की जल संबंधी जरूरतें प्रभावित नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि औद्योगिक विकास के साथ जनहित और जल संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।