– शिवपुरी बना रोल मॉडल: .kmz फाइल से मोबाइल पर दिखी प्रगणकों को सटीक कार्य-सीमा, जनगणना हुई हाईटेक
– जैसे गूगल मैप ने बदला सफर, वैसे शिवपुरी ने बदली जनगणना: डिजिटल नेविगेशन से 100% सटीक डेटा
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
देश में चल रही राष्ट्रीय जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण का काम मई 2026 में पूरा हो चुका है। इस बार जनगणना को हाईटेक और त्रुटिहीन बनाने के लिए शिवपुरी जिले ने ऐसा तकनीकी नवाचार किया है जो पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा के नेतृत्व में नगर पालिका के चार्ज अधिकारी इशांक धाकड़ और नोडल अधिकारी सुधीर मिश्रा की टीम ने पहली बार जनगणना कार्य को ‘डिजिटल नेविगेशन’ से जोड़ा है। शिवपुरी देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां यह तकनीक अपनाई गई।
बाउंड्री का भटकाव हुआ खत्म
अक्सर प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को आवंटित क्षेत्र की सटीक भौगोलिक सीमा पहचानने में दिक्कत होती थी। इस समस्या को खत्म करने के लिए शिवपुरी प्रशासन ने फील्ड स्टाफ को उनके HLBC की .kmz फाइल उपलब्ध कराई।
इस फाइल की मदद से प्रगणक अपने स्मार्टफोन पर ही कार्य-सीमा को डिजिटल मैप पर लाइव देख पा रहे हैं। इससे बाउंड्री को लेकर भ्रम पूरी तरह समाप्त हो गया और डेटा कलेक्शन की शुद्धता सौ फीसदी सुनिश्चित हुई। अब प्रगणकों को यह ढूंढने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ता कि सीमा कहां से शुरू और कहां खत्म हो रही है।
गूगल मैप की तरह बदली जनगणना
इस नवाचार को ऐसे समझें कि कुछ साल पहले तक लिखित पते पर भी अनजान जगह पहुंचना मुश्किल था। लेकिन जीपीएस नेविगेशन ने रास्ता आसान कर दिया। ठीक वैसे ही शिवपुरी प्रशासन ने कागजी नक्शों के भटकाव को डिजिटल नेविगेशन से बदल दिया है।
देश के लिए स्मार्ट रोल मॉडल
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार यह नवाचार जनगणना प्रक्रिया को बेहद सुगम और समय बचाने वाला बनाता है। राष्ट्रीय स्तर पर इस डिजिटल कदम की सराहना हो रही है। डिजिटल इंडिया के दौर में शिवपुरी का यह मॉडल भविष्य की सभी राष्ट्रीय गणनाओं के लिए ‘स्मार्ट रोल मॉडल’ साबित हो सकता है। भारत सरकार इन डिजिटल आंकड़ों का उपयोग आने वाले दशकों की जन नीतियां बनाने में करेगी।