मजदूरों की भारी किल्लत,50 गांवों में हर साल बाहर से बुलाने पड़ते हैं श्रमिक, 3 महीने यहीं पर रहकर करते हैं काम
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के दीवानगंज क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए स्थानीय मजदूरों की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि हर साल किसानों को बोवनी और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दूसरे जिलों और गांवों से मजदूर बुलाने पड़ते हैं।
दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, सरार, कयामपुर, संग्रामपुर, करैया, गिदगढ़, सत्ती, बांसिया, टोला, मुस्काबाद, बालमपुर, देहरी, छोला, चांद पिपरिया, प्रेमपुरा, अनंतपुरा, दहीडा, लंबाखेड़ा, कचनारिया, सोजना सहित करीब 50 गांव इस समस्या से जूझ रहे हैं।
किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मजदूर नहीं मिलने के कारण उन्हें हर साल बाहर से श्रमिक मंगाने पड़ते हैं, जो लगभग 2 से 3 महीने तक क्षेत्र में रहकर काम करते हैं। इन मजदूरों के रहने और खाने की व्यवस्था भी किसानों को ही करनी पड़ती है, जिससे उनकी लागत और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र के कई स्थानीय मजदूर अन्य शहरों में काम करने चले जाते हैं, जिससे गांवों में श्रमिकों की कमी हो जाती है। इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ता है, क्योंकि समय पर मजदूर न मिलने से फसल प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं और कृषि कार्यों के लिए स्थानीय मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मनरेगा जैसी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की भी जरूरत बताई जा रही है, ताकि गांव के लोगों को गांव में ही काम मिल सके।
हर साल दोहराई जाने वाली यह स्थिति अब स्थायी समस्या का रूप ले चुकी है, जिस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।