सागर ।बाहुबली कॉलोनी स्थित जैन धर्मशाला में समाधिस्थ मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज के प्रति विनयांजलि सभा श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। सभा में मुनि श्री महासागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि संसार में सभी निमित्त होते हैं, जबकि आत्मा ही उपादान होती है। उन्होंने बताया कि मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज की समाधि का श्रेय आचार्य श्री समय सागर महाराज को जाता है, जिनकी आज्ञा से ही उन्हें यहां आने और समाधि कराने का अवसर प्राप्त हुआ।
मुनि श्री महासागर महाराज ने कहा कि निर्दोष सागर महाराज ने अपनी आत्मा को निर्दोष बनाते हुए आगे की यात्रा पूर्ण की। उनका गुरुदेव के प्रति अद्भुत समर्पण था। उन्होंने कहा कि यह शरीर व्याधियों का घर है, लेकिन जो साधक विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मकल्याण का भाव बनाए रखता है, वही सच्चा साधक होता है। संलेखना ग्रहण करने वाला श्रमण उत्कृष्ट माना जाता है और वैयावृत्ति में सहयोग करने वालों का भी समाधि मरण होता है।
उन्होंने कहा कि समाधि से एक दिन पूर्व मुनि श्री ने उपवास ग्रहण किया तथा तेरस के दिन उन्होंने यम संलेखना लेने की इच्छा व्यक्त की। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति इसका प्रमाण थी। मुनि श्री ने कहा कि संलेखना घोषित होने के बाद अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए आना चाहिए, ताकि वे इस आध्यात्मिक प्रक्रिया का साक्षी बन सकें।
मुनि श्री ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में प्राप्त धन-वैभव का सदुपयोग आवश्यक है, अन्यथा केवल भोग-विलास में लिप्त रहने से आत्मिक उन्नति संभव नहीं है। उन्होंने धर्म, संयम और संतोषपूर्ण जीवन अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मन में श्रेष्ठ संकल्पों का बीजारोपण करना चाहिए।
सभा को रेखा दीदी, नीलम दीदी, विकास भैया, कीर्ति परिमल जैन जबलपुर, मुकेश जैन (मिनरल), मुकेश जैन (ढाना), सोनिका जैन एवं अखिलेश जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उनके जीवन चरित्र और कृतित्व पर प्रकाश डाला। मंगलाचरण दीक्षा जैन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल मलैया ने किया। अंत में सभी ने मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।