मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम अंबाडी के श्री गणेश चौक सदर बाजार में 23 वर्षों बाद एक बार फिर भव्य रामलीला का मंचन शुरू हो गया है।
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलाकारों ने श्रीराम जन्मोत्सव का मंचन किया। श्रीराम जन्म के बाद दरबार में राजा दशरथ को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था। जानकारी होने पर अयोध्या में भी उत्सव जैसा माहौल था। इतना ही नहीं भगवान शंकर भी श्रीराम के जन्म की बधाई देने के लिए अयोध्या पहुंच गए थे।
मंचन को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु भाव विभोर हो गए और श्रीराम की जय जयकार करने लगे, जिससे पूरा पंडाल गूंजायमान हो गया। मंचन के दौरान दिखाया गया कि राजा दशरथ के कोई पुत्र नहीं था। तब उन्होंने श्रृंगी ऋषि से प्रार्थना की तो उन्होंने उन्हें एक फल दिया और राजा दशरथ से अपनी सभी रानियों को खिलाने के लिए कहा। राजा दशरथ ने उस फल को अपनी सभी रानियों को खिलाया। फल का सेवन करने के बाद रानी कौशल्या ने श्री राम, सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न, रानी कैकेई ने भरत को जन्म दिया। ऐसे में इस दिन को जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए श्रीराम जन्मोत्सव के सुंदर एवं मनमोहक दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। श्रीराम जन्म की जानकारी होने पर अयोध्यावासी उत्सव मनाते हुए एक दूसरे को बधाई देने लगे। राजा दशरथ को दरबार में बधाइयां देने वालों का तांता लग जाता है। ऐसे में भगवान शंकर को श्री राम के जन्म का पता चलता है तो वह भी माता कौशल्या के पास उनके दर्शन को पहुंचते हैं, लेकिन उनके गले में सांप को देखकर वह उन्हें श्रीराम को दिखाने से इन्कार कर देती हैं तब भगवान शंकर साधु के वेश में वहां पर पहुंचते हैं और श्री राम के दर्शन करते हैं। चारों भाइयों के जन्म पर अयोध्या में मंगल गीत गाए गए। दूसरे दिन बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला देखने पहुंचे। बाद में गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों के नामकरण करने की कथा का मनोहारी मंचन किया। विश्वामित्र द्वारा भगवान राम और लक्ष्मण को शिक्षा दीक्षा के लिए ले जाने की कथा का भी मनोहारी मंचन कलाकारों द्वारा किया।
जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जानकारी के अनुसार, गणेश चौक सदर बाजार में करीब 23 साल पहले नियमित रूप से रामलीला का मंचन होता था, लेकिन लंबे समय से यह परंपरा बंद हो गई थी। अब ग्रामवासियों ने एकजुट होकर इस धार्मिक परंपरा को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे पूरे गांव में उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
आयोजकों के मुताबिक, ग्रामवासियों के सहयोग से 19 मार्च से 28 मार्च तक प्रतिदिन शाम 8 बजे से रात्रि 12 बजे तक श्रीराम कथा एवं रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। 10 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। साथ ही कथा वाचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और आदर्श जीवन के संदेश भी दिए जाएंगे।