विदिशा । प्राचीन धरोहरों के लिये कार्य कर रही संस्था विरासत ग्रुप, इंटेक विदिशा, बेतवा बिरादरी, बलविहार कल्याण समिति,विदिशा सेवा संस्थान और अनेक स्वतंत्र समूहो ने विधायक श्री टण्डन तथा नगरपालिका में सांसद प्रतिनिधि के साथ श्रमदान किया।

लगभग 175 वर्ष पुराने बेतवा के पुल पर,जो रायसेन को जोड़ने वाला प्रमुख साधन रहा है, उस पुल को धरोहर मानते हुए,सरक्षित रखे जाने के उद्देश्य से नगर के शताधिक नागरिकों ने श्रमदान किया। विदिशा की विरासत के अध्यक्ष गोविंद देवलिया की पहल से ही, नगर के ही सक्रिय युवा अरविंद श्रीवास्तव और ऋषि जालोरी ने नागरिकों सहित प्रशासन से पुल के पुनरोद्धार की मांग की थी,जिसके फलस्वरूप 6 दिसम्बर शनिवार को बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और श्रमदान किया।

– करीब 175 साल पहले मात्र दो कौड़ी के जुर्माना के बदले में बनाया था पुल
पुरातत्व धरोहरों के संरक्षण के लिए काम कर रहे राष्ट्रीय स्तर के संगठन इंटक के विदिशा के पदाधिकारी द्वारा विरासत के रूप में देखी जा रहे रंगई स्थित बेतवा नदी के पुराने पुल की जीर्ण क्षीण हालत और वहां उग आई झाड़ियां को हटाने, उसकी साफ सफाई करने के लिए श्रमदान किया गया।

इंटेक्स के पदाधिकारी अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि यह पुल तकरीबन 175 साल पहले यहां के तत्कालीन जागीरदार द्वारा बनवाया गया था। उन पर सिंधिया रियासत द्वारा दो कोढी का जुर्माना किया गया था। उन्होंने वह जुर्माना न भरते हुए इस पुल का निर्माण कराया। जो दो सदी तक यातायात के लिए प्रमुख साधन रहा। अब नया पुल बनने के बाद इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा।इंटेक के पदाधिकारी ऋषि जालौरी ने बताया कि इस पुल को संरक्षित करने और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही है ।