उदयपुरा रायसेन। श्री रामचरितमानस विद्यापीठ के तत्वाधान में आयोजित सत्संग, सेवा, सुमिरन, मानस यात्रा नगर के नर्मदा धर्मशाला पहुंचने पर आयोजक नारायण सिंह मेहरा पूर्व कृषि विस्तार अधिकारी, द्वारा अपने परिजनों के साथ विद्वान जनों एवं अतिथियों का पुष्प ,चंदन से स्वागत सम्मान किया, आयोजित सत्संग सभा में रामचरितमानस के नारद मोह प्रसंग की व्याख्या करते हुए, मानस आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि नारद जी जैसे संत पर भी अहंकार के साथ काम एवं क्रोध जैसे दुर्गुणों का प्रभाव पड़ने पर उनका निवारण, उनकी सद् साधना एवं जन कल्याण की भावना के कारण प्रभु श्री राम ने संत के दुर्गुणों के प्रभाव का निवारण सरलता एवं सहजता से किया, इस तरह ईश्वर संत, साधू, और सज्जनों पर पढ़ने वाले दुर्गुणों के प्रभाव को हमेशा दूर करते रहते हैं, सत्संग सभा को धर्माधिकारी राजेंद्र शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी, हरिदास शास्त्री, कुंवर लाल रामायणी, लक्ष्मण पचौरी, सुदामा शास्त्री एवं योगेश पांडे ने रोचक कथा प्रसंगों को सुनते हुए ज्ञानवर्धक विचारों को रखा।

यात्रा संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता चतुरनारायण रघुवंशी ने बताया कि निस्वार्थ भावना से नर्मदा अंचल के विद्वानों का मानस प्रचार प्रसार में बहुत बड़ा योगदान है, सत्संग सभा में सुधी श्रोता, दुर्गा प्रसाद मिश्रा, संतोष पचौरी, चंद्र प्रकाश शास्त्री, निरंजन सिंह राजपूत, कैलाश शर्मा अधिवक्ता राजेश कटारे, अरुण कुमार उदेनिया, सीताराम धाकड़, डॉ कंछेदी लाल राजपूत, मणिकांत श्रीवास्तव, राजकिशोर कौरव, रामबाबू शर्मा, नर्मदा प्रसाद रघु, रामबाबू कृषि अधिकारी, अशोक कुमार, गोविंद सिंह, बलदेव सिंह, गिरवर सिंह सेलावत, आसाराम मेहरा, महेंद्र राजपूत, सहित बड़ी संख्या में मानस प्रेमी जनों ने सत्संग, श्रवण कर मानस ग्रंथ ,आरती, दर्शन के साथ प्रसाद ग्रहण किया,