उवेश खान सिलवानी रायसेन
सिलवानी तहसील के ग्राम गुंदरई में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 13 साल की मासूम खुशी लोधी ने माता मंदिर के पास अपने ही घर में फांसी लगा ली। जब परिवार वालों ने उसे देखा, तो चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव में मातम पसर गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि हंसती-खेलती खुशी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
जैसे ही पुलिस को घटना की जानकारी मिली, टीम मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारकर सिविल अस्पताल, सिलवानी भेजा गया। वहां डॉक्टर एच.एन. मांडरे ने पोस्टमॉर्टम किया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया।
लेकिन इस घटना ने सबको अंदर तक झकझोर कर रख दिया, क्योंकि मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। उस नोट में लिखा था—
“मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना, मैं फेल हो गई, इसलिए खुदकुशी कर रही हूं। भगवान आपको मेरी भी उम्र दे दे।”
ये शब्द पढ़कर हर किसी का दिल कांप उठा। क्या अंक ही हमारी जिंदगी से ज्यादा अहम हो गए हैं? क्या हमारे बच्चों पर इतना दबाव है कि वे खुद को खत्म करने का फैसला ले लेते हैं?
थाना प्रभारी बम्होरी प्रीतम सिंह राजपूत ने बताया कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या हमारा समाज और शिक्षा प्रणाली बच्चों पर इतना बोझ डाल रही है कि वे ज़िंदगी से हार मान लें?