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नो स्मोकिंग डे: स्वस्थ जीवन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम- डॉ. हर्ष विभोर भारती 

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हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को धूम्रपान छोड़ने और स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस वर्ष, 12 मार्च 2025 को यह दिन मनाया जा रहा है, और एक दंत चिकित्सक होने के नाते, मैं इसे और अधिक प्रासंगिक मानता हूँ, क्योंकि धूम्रपान न केवल हमारे फेफड़ों और हृदय के लिए हानिकारक है, बल्कि यह हमारे दांतों, मसूड़ों और मुख स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

धूम्रपान: स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर
धूम्रपान केवल एक व्यक्तिगत लत नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, तंबाकू सेवन के कारण हर साल 80 लाख से अधिक लोग असमय मृत्यु का शिकार होते हैं। इनमें से लगभग 12 लाख लोग ऐसे होते हैं, जो स्वयं धूम्रपान नहीं करते, लेकिन दूसरों के धुएं के कारण गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।

मुख स्वास्थ्य पर प्रभाव:
एक दंत चिकित्सक के रूप में मैं देखता हूँ कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में मसूड़ों की बीमारियाँ, दांतों का पीलापन, सांसों की दुर्गंध और यहां तक कि मुख कैंसर होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। धूम्रपान करने से रक्त संचार प्रभावित होता है, जिससे मसूड़े कमजोर हो जाते हैं और दांत समय से पहले गिरने लगते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि तंबाकू सेवन मुख कैंसर का एक प्रमुख कारण है, जिससे हर साल हजारों लोगों की जान चली जाती है।

नो स्मोकिंग डे की वर्तमान समय में प्रासंगिकता
आज जब पूरी दुनिया स्वास्थ्य और जागरूकता की ओर बढ़ रही है, तब धूम्रपान जैसी घातक आदत को छोड़ना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। कोविड-19 महामारी ने हमें सिखाया कि हमारी सांस संबंधी प्रणाली को मजबूत रखना कितना जरूरी है, और धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में फेफड़ों की बीमारियों और संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

इसके अलावा, धूम्रपान केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। तंबाकू उद्योग जंगलों की कटाई, वायु प्रदूषण और प्लास्टिक कचरे को बढ़ावा देता है, जिससे हमारा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

क्या किया जाना चाहिए?
इस नो स्मोकिंग डे पर हमें निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

स्वयं धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।युवाओं को जागरूक करें कि धूम्रपान सेहत के लिए कितना खतरनाक है।तंबाकू नियंत्रण के लिए सरकार को कड़े नियम लागू करने चाहिए, जिससे धूम्रपान की लत कम हो।धूम्रपान छोड़ने के लिए परामर्श सेवाओं और हेल्पलाइन नंबरों का अधिक से अधिक प्रचार किया जाए।

निष्कर्ष
धूम्रपान छोड़ना सिर्फ एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। एक दंत चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी होने के नाते, मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि वे तंबाकू मुक्त जीवन अपनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। इस नो स्मोकिंग डे पर आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें—

धूम्रपान को छोड़ें, जीवन को अपनाएं! स्वस्थ भारत, सशक्त भारत!

-डॉ. हर्ष विभोर भारतीजिला अस्पताल शासकीय इन दंत चिकित्सक हें

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