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कोकुलपुर में कार्तिक पूर्णिमा को रानी विषया के सती स्थल पर परंपरानुसार लगा मेला

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रानी विषया के सती स्थल पर भरा मेला, 80 क्विंटल मिठाई बिकी

शरद शर्मा बेगमगंज,रायसेन

नगर से सागर की ओर ग्राम बेरखेड़ी होते हुए मात्र 9 किलोमीटर दूर नेपाल से आए राजा सूर्य नरेश की नगरी कुंतलपुर जिसका बिगड़ा नाम कोकलपुर में कार्तिक पूर्णिमा को रानी विषया के सती स्थल पर परंपरानुसार मेले का आयोजन किया गया। जहां दूर-दराज से आए लोगों ने रानी विषया देवी के सती स्थल पर पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं रखीं। जिनकी मनोकामनाएं पूर्ण हो चुकी हैं उन्होंने भी यहां पर मिठाई का प्रसाद चढ़ा कर वितरित किया।

वर्षों से तालाब के किनारे रानी सती विषया देवी का सिद्ध स्थान पर मेला भरता आ रहा है। इस मेले की विशेषता है कि यहां पर क्विंटलों मिठाई बिकने के लिए आती है और कोई भी व्यापारी बचा कर नहीं ले जाता। शाम ढलने से पहले ही सारी मिठाई बिक जाती है। मिठाई की कीमत भी कम होती है और उसे खाकर आज तक कोई भी बीमार नहीं हुआ है। किवदंती है कि यहां जिन्न आकर मिठाई खरीदकर खाते हैं।

मेले में आसपास के गांवों के बुजुर्गों ने नृत्य करते हुए गीतों के माध्यम से रानी विषया देवी की प्रेम गाथा का वर्णन बड़े ही मार्मिक अंदाज में किया, जिसे सुनकर लोग पुरानी यादों में खो गए । रानी विषयादेवी के सती स्थल पर पूजा-अर्चना कराने वाले गांव के बुजुर्गो ने यहां के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सती विषया देवी एवं राजा चंद्रहास राजा सूर्य नरेश का इतिहास विश्राम सागर में संक्षिप्त रूप से एवं धार्मिक ग्रंथ जैमिनी पुराण में अध्याय 41 से 62 विस्तार पूर्वक तक दिया हुआ है। महाभारत युद्ध के पूरा होने के बाद दिग्विजय यज्ञ का घोड़ा छोड़कर पांडु पुत्र देश भ्रमण पर निकले तो कुंतलपुर के राजा चंद्रहास ने उक्त घोड़ा पकड़ लिया जिस पर पांडु पुत्र अर्जुन और राजा चंद्रहास के बीच युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई, तब द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने दोनों भक्तों के बीच आकर मित्रता करवाई और साढ़े तीन दिन तक श्री कृष्ण यहां पर रुके फिर पांडु पुत्र राजा चंद्रहास को भी साथ लेकर अन्य राजाओं को अपने अधीन करने निकल पड़े तब काशी के समीप हुए युद्ध में राजा चंद्रहास वीर गति को पहुंच गए तो उनका पार्थिव शरीर जब कुंतलपुर लाया गया तो रानी विषया ने अपने आप को सती कर लिया।

मेले में मिठाई के अलावा श्रंगार सामान भी बिका:-
मेले में अन्य वस्तुओं की दुकानें विशेष तौर पर महिलाओं के श्रंगार की दुकानों पर जमकर बिक्री हुई। दूर-दराज ग्रामों से मेला देखने अपने परिवार के साथ आई महिलाओं ने ऋंगार सामग्री की खरीदारी जमकर की। मेले में जनप्रतिनिधियों के अलावा राजनैतिक पार्टियों के कार्यकर्ता भी पहुंचे और उन्होंने सती स्थल पर माथा टेककर प्रसाद चढ़ाया।

80 क्विंटल लाए मिठाई:-

मेले में आए मिष्ठान बेचने वाले नारायण प्रसाद नेमा, सुदामा नेमा, मदन नेमा ने बताया कि वे दस-दस क्विंटल व अन्य एक दर्जन व्यापारी करीब 80 क्विंटल मिठाई लेकर आए थे। सभी की संपूर्ण मिठाई बिकी। कोई बचा कर नहीं ले गया। वे अपने पिता के साथ करीब 32 वर्षों से आ रहे हैं। उससे पहले उनके पिता अपने पिता के साथ आते थे, तब मनों मिठाई बिकती थी जो अब क्विंटलों में बदल गई है।

मेले में अधिकतर युगल जोड़े हुए शामिल:-
मेले में अधिकतर युगल जोड़े तथा युवा बड़ी संख्या में सती स्थल पर पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं रखते हैं, क्योंकि राजा चंद्रहास और सती विषया की प्रेम स्थली के रूप में भी लोग इसे देखते हैं और मनचाही मुरादें पाते हैं।
फोटो – मेले में मिठाइयां खरीदते श्रद्धालु।

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