मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को 2 वर्ष पूर्व 2022 में पीएमश्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नाम दिया गया था। केवल स्कूल को पीएमश्री नाम ही मिला है। नाम के हिसाब से स्कूल की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।

जानकारी के अनुसार स्कूल के फंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, पहले जितना फंड आता था उतना ही अब आ रहा है। रेगुलर शिक्षक 15 है, जबकि व्यावसायिक शिक्षक सहित 21 शिक्षको की व्यवस्था होना चाहिए था। खेल ग्राउंड तो है मगर उसमें कमर कमर तक घास फूस उग आई है। खेलने कूदने की ग्राउंड कोई व्यवस्था नहीं हैं। अधिकारी सर्वे कर ले गए हैं।स्कूल में 564 छात्र छात्राएं हैं इन सभी को पहले से ही बैठने के लिए पर्याप्त टेबल कुर्सी है।

दसवीं में 2021-22 में 53 प्रतिशत तो 12वीं में 70.12 प्रतिशत रिजल्ट आया था जबकि 2022-23 में दसवीं का 91 प्रतिशत तो 12वीं का 79 प्रतिशत रिजल्ट आया था जबकि 2023 _ 24 में दसवीं का 92.63 प्रतिशत तो 12वीं का 76.04 प्रतिशत रिजल्ट रहा। हालांकि दोनों बरसों की तुलना में दसवीं का रिजल्ट बड़ा है जबकि 12वीं का रिजल्ट पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 3 प्रतिशत कम रहा है।
प्राचार्य टीडी मेश्रामऔर सभी शिक्षकों का कहना है कि कुछ छात्र छात्राएं 9 किलोमीटर दूर से आती है जिनको आने-जाने में काफी समय लगता है। हम सभी लोगों ने क्षेत्रीय विधायक डॉ प्रभु राम चौधरी को जमुनिया गांव को हाई स्कूल में तब्दील करने का आवेदन दिया है। क्योंकि जमुनिया हाई स्कूल हो जाएगा तो बच्चों को 9 किलोमीटर दूर नहीं आना पड़ेगा। दीवानगंज स्कूल से कयामपुर, संग्रामपुर, जमुनिया, निनोद, सरार आदि गांव 9 किलोमीटर दूर पढ़ते हैं। जमुनिया हाई स्कूल हो जाएगा तो डेढ़ सौ बच्चों को इतनी दूर नहीं आना पड़ेगा।
सन 1995 में पीएमश्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की बिल्डिंग बनी थी जो अब क्षतिग्रस्त होने लगी है। जिस कमरे में छात्र-छात्राएं की क्लासें लगती है उन सभी कमरों मे बारिश का पानी टपकता है सभी कमरों मे सिडन आती है। बारिश में छात्र-छात्राएं सहित शिक्षकों को भी पढ़ाने में समस्या आती हैं क्योंकि कमरे में जगह-जगह पानी टपकता है।

इसी साल से बच्चों को कंप्यूटर चलाने की शिक्षा भी देना प्रारंभ कर दी है।सरकार ने केवल स्कूल का नाम ही बदला व्यवस्था पहले जैसी ही है। बिल्डिंग 30 साल पुरानी हो गई है जगह-जगह से तड़क रही है। जिसने भी बिल्डिंग बनाई है वहां सही तरीके से नहीं बनी है। इससे पहले बिल्डिंग की कई बार रिपेयरिंग कराई गई है इसके बावजूद भी पानी टपकता है। स्कूल में लैब और लाइब्रेरी के लिए कमरा नहीं है बच्चों को क्लास में ही सामान ले जाकर लेव का कार्य करना पड़ता है। स्कूल में 500 बच्चों की क्षमता है और 600 के लगभग बच्चे हैं बच्चों को बैठने के लिए कमरों की आवश्यकता है। गणित, केमिस्ट्री,संस्कृत, राजनीति, और इतिहास के शिक्षक नहीं है अतिथि शिक्षक को से काम चलाना पड़ रहा है। साल भर में 75000 का फंड आता है जिससे सारे कार्य करने होते हैं।
इनका कहना हे –
स्कूल में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण लैब और लाइब्रेरी के लिए कमरा नहीं है बच्चों को क्लास रूम में ही लैब का कार्य करना पड़ता है बिल्डिंग भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। जिसमें पानी टपकता है।
टीडी मेश्राम प्राचार्य दीवानगंज