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पुरातात्विक महत्व के पर्यटन स्थल  सतधारा की सीसी रोड हुई जर्जर जिम्मेदार बेखबर,सेकड़ो पर्यटक पहुंचते हे सतधारा

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देवेन्द्र तिवारी सांची,रायसेन

वैसे तो यह स्थल पुरातात्विक दृश्टि से महत्वपूर्ण माना जाता हैं इस सम्पूर्ण क्षेत्र मे पुरातात्विक धरोहरो को सुरक्षित संरक्षण का बीडा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जिम्मे है आसपास क्षेत्र मे फैली पुरातत्व धरोहरो का केन्द्र सांची माना जाता है ।सलामतपुर से पांच किमी दूर सत्धारा पहुंच मार्ग टूटने फूटने से पर्यटकों की जान जोखिम मे डाल रहा है परन्तु इस ओर न तो पुरातत्व विभाग न ही जिला प्रशासन का ध्यान पहुंच पा रहा है ।
जानकारी के अनुसार यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से ऐतिहासिकता से भरा पडा है सांची मे विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्मारक होने से यह पुरातत्व विभाग का उपमंडल माना जाता है यहां से लगभग 14 किमी दूर स्थित सुनारी जहाँ बौद्ध स्तूप होने से महत्वपूर्ण हो गया है तथा पुरातत्व विभाग उसकी देखरेख करता है इसके साथ है यहाँ से लगभग 15 किमी दूर स्थित प्रसिद्ध बौद्ध स्मारकों से घिरा पहाड़ी क्षेत्र सत्धारा के नाम से जाना जाता है ।

यहाँ सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार की दृष्टि से लगभग 27 स्तूप निर्मित कराये थे परंतु इन स्तूपों के घने जंगल मे होने के कारण नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए थे अंग्रेजी शासन के दौरान पुरातत्व विभाग के अफसरों ने सांची स्तूपों की खोज के दौरान 272-238 ईसा पूर्व सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्तूपों की खोज की थी इन स्मारकों को 1989 मे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया तब इन स्मारकों को मूर्त रूप देने पुरातत्व विभाग ने कवायद शुरू की तथा समय समय पर सरकारों ने करोड़ों रुपये आवंटन किये तथा इनको मूर्त रूप देने विभाग ने अपने कार्य शुरू कर दिये परन्तु इन स्मारकों तक पहुंचने अच्छे मार्ग न होने से विभाग को मुश्किलें उठानी पडी धीरे धीरे समय बढता गया एवं पुरातत्व विभाग द्वारा यहां पहुंचने डब्ल्यू बीएम रोड निर्माण कराया।

इस सत्धारा पहाड़ी पर वैदिक स्तंभ कमल पुष्प आलेख सिंह वेष्टिक वृक्ष बडी संख्या मे मानवाकृति अलंकरण सहित बडी संख्या मे दानदाताओं के अभिलेख सहित भगवान बुद्ध के परम शिष्य सारिपुत्र महामोदग्लाइन के अस्थि अवशेष भी प्राप्त हुए थे वहीं यहां शैलाश्रय बौद्ध का व्यक्ति चित्र बिहार तथा मंदिर पाये गए ।परन्तु इन स्तूपों के संरक्षण हेतु पुरातत्व विभाग द्वारा लाखों करोड़ों रुपये फूंक दिये परन्तु खर्च के हिसाब से इनका प्रचार प्रसार नही हो सका ।जबकि इन स्मारकों को राष्ट्रीय स्मारकों की श्रेणी मे तो ला खडा किया परन्तु इनका वीराना पन खत्म नही हो सका ।वर्ष 1992 मे यूनेस्कों द्वारा इस विकसित करने के लिये 50 लाख रुपए की राशि आवंटित की जिससे बहुत कम विकास हो सका बताया जाता है इस पर यूनेस्कों ने विकास पर आपत्ति भी दर्ज करा दी थी इसके अलावा करोड़ों रुपये की राशि आवंटित हुई परन्तु कहा खर्च की गई किसी को नहीं पता ।तथा इन्हें खर्च के अनुसार प्रसिद्धि नही मिल सकी ।यहां न तो बिजली ही पहुंच सकी न ही सडक व्यवस्था हो सकी जिससे गिने चुने पर्यटक ही पहुंच पाते है।सडक की मांग पर मुख्यमंत्री ग्राम सडक योजना अंतर्गत 1 करोड़ 22 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई ।तथा वर्ष 18 मे सडक निर्माण शुरू हुआ तथा इसकी लंबाई 1.679 मे डामरीकरण किया गया तथा इतनी ही लंबाई मे सीसी रोड निर्माण कराया गया जिससे आसपास गाँव को भी इसका लाभ मिलने लगा परन्तु सीसी रोड निर्माण होते ही गुणवत्ता पर सवाल खडे होने लगे थे परन्तु ऊंची पहुंच वाली निर्माण ऐजेंसी ने किसी की एक नहीं सुनी तथा कुछ वर्ष के अंतराल मे ही इस रोड ने अपने घटिया गुणवत्ता की कल ई खोलकर रख दी तथा सडक ने जमीन छोडना शुरू कर दी जिससे इन स्मारकों पर पहुंचने वाले पर्यटकों की जान जोखिम मे आ चुकी हैं तथा दुर्घटना की आशंका भी बढ गई है परन्तु न तो पुरातत्व विभाग ही देखने की हिम्मत जुटा पा रहा हैं न ही जिला प्रशासन को ही सुध लेने की फुरसत मिल सकी ।इस मामले मे इनका

इनका कहना है-
मुख्यमंत्री सडक योजना अंतर्गत एक करोड़ बाइस लाख रूपये से निर्मित सडक अपनी समयावधि होते ही उखडऩे लगी ठेकेदार से मांग करने के बाद भी मरम्मत नही हो सकी जिससे पर्यटकों की जान जोखिम मे आ चुकी है।जसवंत तोमर गाडरखेडी ,ग्रामीण
हमने ठेकेदार से एक वर्ष पूर्व ही मरम्मत के लिये बोला परन्तु निर्माण ऐजेंसी ने गंभीरता से नही लिया जिससे अब सडक तुकडे मे टूटने लगी है जिससे गांव वालो के साथ ही पर्यटक भी खतरे मैं पड गए हैं

दशरथसिंह राजपूत पूर्व सरपंच नरोदा 

इस सडक का निर्माण पर्यटन विभाग द्वारा कराया गया था इस सडक को किसान अपने खेतों मे पानी ले जाने खुदाई कर डालते हैं जिससे सडक टूट रही है हमारे पास कोई अधिकार नही है कि हम कुछ कर सके ।जबकि जिला प्रशासन के अधिकारी आते जाते रहते हैं सडक खुदाईकरने वालों पर उन्हें कार्रवाई करना चाहिए

संदीप मेहतो प्रभारी पुरातत्व विभाग उप मंडल सांची

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