आस्थाएं, मान्यताएं, परम्पराएं, पर्व-त्यौहार ही हमारी सांस्कृतिक पहचान
छात्र-छात्राओं ने नर्मदा परिक्रमा पर बनायी पेंटिग
भोपाल। संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से धरोहर संस्था द्वारा लोकसंस्कृति के विविध आयाम संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भेल भोपाल में किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि वरिष्ठ कलाकार श्रीमती दीपा श्रीवास्तव, डॉ संजय जैन
प्राचार्य बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महावद्यिालय, श्रीमती पूजा सक्सेना सचिव धरोहर के द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। श्रीमती दीपा श्रीवास्तव द्वारा अपने बीज वक्तव्य लोकसंस्कृति के विविध आयामों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि हमारी दैनिक जीवनचर्या में हम जिन नैतिक मूल्यों का पालन करते हैं वे ही लोक की संस्कृति सुनिश्चित करते हैं। हमारी आस्थाएं, मान्यताएं, परम्पराएं, पर्व-त्यौहार हमारी संस्कृति को पुष्ट करते हैं।

मुख्य वक्ता पूजा सक्सेना ने नर्मदा परिक्रमा के महात्म्य पर पर प्रकाश डाला। डॉ संजय जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों को बचाने का एक ही तरीका है कि हम अपनी संस्कृति के अच्छे मूल्यों का निर्वहन करते रहें और समय के साथ आ गयी कुप्रथाओं को छोड़ते चलें। संगोष्ठी में डॉ. गीता चौहान सहायक प्राध्यापक भेल कॉलेज, डॉ मेघा सिंह, डॉ अनुराधा सिंह, डॉ रेनू श्रीवास्तव सहायक प्राध्यापक श्री सत्य साईं महाविद्यालय, सुश्री प्रियंका तिवारी रिसर्च स्कॉलर, श्री देवांशु द्विवेदी आदि ने शोधपत्रों को वाचन किया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला में श्री प्रदीप पटेल ने नर्मदा परिक्रमा थीम पर वर्ली आर्ट के माध्यम से दीवार पर पेंटिंग बना कर प्रतिभागियों को डिमॉस्ट्रेशन दिया। वर्कशॉप में भेल महाविद्यालय तथा श्री सत्य साई महाविद्यालयों के पेंटिंग कला में रूचि अनेक वाले अनेक शोधार्थियों विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने पेंटिंग बनाकर लोकसंस्कृति के विविध आयामों को चित्रित किया। इस अवसर पर डॉ अर्चना शर्मा विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र एवं श्रीमती नीलिमा गुर्जर धरोहर संस्था विशेष रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम में सृजन श्री सत्य साई महाविद्यालय पूर्व छात्रा संघ ने भी सहभागिता की।