आवारा कुत्तों का आतंक रोजाना दो दर्जन को बना रहे निशाना,एक साल में 9 हजार से अधिक लोगो को बनाया शिकार
अनुराग शर्मा सीहोर
शहरों की गलियों से लेकर गांवों तक आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है, आवारा कुत्ते हिंसक होकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं, राेजाना कुत्तों के काटने के मामले सामने आ रहे हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे लोग कुत्तों से भयाक्रांत हो रहे हैं, तो वहीं कई वर्षों से कुत्तों को एंटीरेबीज और नसबंदी नहीं की गई है, इससे कुत्तों की तादात भी बढ़ रही है।
जिले की बात करें तो रोजाना दो दर्जन लोग कुत्तों के शिकार बन रहे हैं, लेकिन इस समस्या के रोकथाम की दिशा में जिम्मेवार कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। आंकड़े की माने तो जिले में बीते साल 2023 में 9 हजार 111 कुत्तों के काटने के मामले सामने आए है। जिनमें कई बार छोटे बच्चों पर घातक हमले भी कुत्तों पर किए गए हैं, चौक चौराहों और मुहल्लों में आवारा कुत्तों की फौज देख्ाी जा सकती है, इस कारण पैदल आवाजाही करने वाले लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
कुत्ता,बिल्ली, बंदर सब हो रहे हिंसक
जिले भर के लोग आवारा और हिंसक कुत्तों से परेशान है, बीते साल जिले भर में 9111 लोगों को आवारा और कुछ पालतु कुत्तों ने काटा। इसमें सबसे अिधक कुत्तों के काटने की घटनाएं सीहोर में सामने आई जहां 2951 लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया। इसी प्रकार इछावर में 991 वहीं भेरूंदा 1974, श्यामपुर 560, आष्टा 1481, और बुधनी में 1154 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा। इसी के साथ बिल्ली के काटने के 201 मामले सामने आए हैं, तो वहीं बंदरों 187 लोगों पर हमला किया, वहीं अन्य हिंसक जानवरों की चपेट में 237 लोग आए। इस प्रकार जिले भर में कुत्ता सहित भालू, सियार अन्य हिंसक जानवरों ने 9736 लोगों को काटा।
नहीं चलाया गया अभियान
कुत्तों को एंटीरेबीज इंजेक्शन लगाने एवं कुत्तों की नसबंदी को लेकर नगर पालिकाएं सजग नहीं है, इसका उदाहरण है कि बीते कई सालों से कुत्तों को एंटीरेबीज इंजेक्शन लगाने एवं कुत्तों की नसबंदी को लेकर कोई अभियान नहीं चलाया गया है, इससे कुत्तों की आबादी में वृद्धि भी हुई और वह हिंसक भी होते जा रहे हैं। कुत्तों के काटने की घटनाएं जिले में ही नहीं प्रदेश में बढ़ रही है, इससे पशुचिकित्सा विभाग द्वारा एडवायजरी भी जारी की गई है।
पशु विभाग ने हमें नहीं भेजा पत्र
इस संबंध में नगर पालिका सीहोर में स्वच्छता प्रभारी अमित यादव का कहना है कि पशु चिकित्सा विभाग हमें पत्राचार कर बताता है, इसके बाद हम कार्रवाई करते हैं, हमारा दल उन्हें पकड़ता है, इंजेक्शन और नसबंदी का काम पशु चिकित्सा विभाग का है, इस संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
निकायों का काम है
इस संबंध में पशु चिकित्सा विभाग सीहोर के उपसंचालक डा एकेएस भदोरिया का कहना है कि शहरों में नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों की यह जिम्मेवारी है, हमारा विभाग डाक्टर उपलब्ध कराता है, निकायों ने ऐसी कोई मांग नहीं की जबकि हम कई बार पत्र भी भेज चुके हैं, हमारी टीम तैयार है।