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मुरैना में रुपये नहीं, जमा होती है राम नाम की ‘पूंजी’, इकट्ठा कर भेजा जाता है अयोध्या

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मुरैना। बैंक का नाम आते ही सभी के मन में एक ही बात आती है, रुपया-पैसा जमा कराने वाली बैंक। लेकिन मुरैना के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल करह आश्रम में एक ऐसी बैंक है, जहां सिर्फ राम का नाम ही जमा किया जाता है। साढ़े तीन दशक से चल रही श्री सीताराम लेखन बैंक में अब तक करोड़ों लोग अरबों रामनाम लिखीं कांपियां जमा करा चुके हैं, जिन्हें मंदिर प्रबंधन भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या भेजता है। वर्तमान में भी राम नाम लिखी लाखों कॉपियों से बैंक के लॉकरों सहित दो कमरे भरे हुए हैं।

मुरैना शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है करह आश्रम, जिसे क्षेत्रीय लोग पटिया वाले बाबा के नाम से जानते और पहचानते हैं। इसी मंदिर परिसर में एक छोटे से कमरे में श्री सीताराम लेखन बैंक शुरू हुई। पहले मंदिर पर आने वाले श्रद्धालु ही यहां रामनाम लिखी कांपियां जमा कराते, लेकिन समय के साथ इस बैंक का बिस्तार होता गया।

नूराबाद, बानमोर, मुरैना, सुमावली क्षेत्र के 125 से ज्यादा गांवों से लेकर मुरैना शहर, अंबाह, पोरसा, जौरा, कैलारस और राजस्थान के धौलपुर, बाड़ी, बसेड़ी, राजखेड़ा आदि क्षेत्रों के कईयों मंदिर व धार्मिक संस्थाओं ने यहां राम नाम लिखी कॉपियां जमा कराना शुरू कर दिया। रामनाम लिखी कांपियां इतनी आने लगीं, कि उनसे श्री सीताराम लेखन बैंक के लाकर (अलमारियां) ही नहीं, बल्कि दो कमरे भरे हुए हैं।

करह आश्रम में बनीं श्री सीताराम लेखन बैंक में आने वाली राम नाम लिखी कांपियों को मंदिर प्रबंधन अयोध्या भेजता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार अयोध्या के मणिरामदास छावनी में स्थित श्री अंतरराष्ट्रीय सीताराम नाम लेखन बैंक में श्रद्धालुओं द्वारा लिखी जाने वाली रामनाम की कॉपियों को भेजा जाता है। अंतिम बार दो साल पहले मिनी ट्रक से लाखों कॉपियां अयोध्या भेजी थी। वर्तमान में भी ढाई से तीन लाख कॉपियां दो कमरों में जमा है। इन्हें भी अयोध्या भेजने की योजना पर मंदिर प्रबंधन चर्चा कर रहा है। अयोध्या से अंतरराष्ट्रीय सीताराम बैंक से सहमति मिलने के बाद ही इन कॉपियों को वहां भेजा जाएगा।

करह आश्रम की कई विशेषताओं में से एक यह भी है, कि यहां आधी सदी से ज्यादा समय से रामधुन का अनवरत कीर्तन चल रहा है। जिस पटिया पर बैठकर बाबा रतन दास जी महाराज ने घोर तपस्या की, उसी पटिया पास रामधुन का जात चलता है। दिन हो, रात हो, जमा देने वाली शीत लहर हो, झमाझम बारिश या फिर झुलसा देने वाली गर्मी हो। प्रत्येक मौसम के हर क्षण इस मंदिर परिसर ‘ सीताराम… सीताराम…. राधेश्याम जय… राधेश्याम‘‘ की धुन सुनाई देती है।

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