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पुरातत्व राष्ट्र की निधि-जैनाचार्य विद्यासागरजी

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सुरेंद्र जैन रायपुर

पुरातत्व राष्ट्र की निधी है ऐसे राष्ट्र की निधी को सुरक्षित रखना चाहिये राष्ट्र के लिये दिया गया धन कभी भी खाली नहीं जाता वह राष्ट्र की सुरक्षा के लिये ही काम आता है””राष्ट्र ध्वज हो या धर्म ध्वज यह मात्र बस्त्र का टुकड़ा नहीं है,इसमें बहूत कुछ इतिहास छुपा हुआ है और इसी में भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण है” उपरोक्त उदगार संत शिरोमणि आचार्य गुरूदेव श्री विद्यासागरजी महाराज ने मालवीय रोड़ स्थित श्री आदिनाथ दि. जैन मंदिर प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये। दौपहर में एक बजे आचार्य श्री संघ का रायपुर से मंगल विहार करते हुये डी.डी.नगर जैन मंदिर के दर्शन करके भिलाई रोड़ पर विहार किया रात्री विश्राम सांकरा गांव प्राथमिक शाला में होकर गुरुवार की आहार चर्या दौलत वाटिका के सामने जामगांव में होगी उपरोक्त जानकारी अविनाश जैन विदिशा ने देते हुये बताया -आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के माध्यम से कहा कि जैसे प्रातःकाल प्रभातफेरी होती है एक बालक धर्म धव्जा लेकर आगे बड़ता है, उसके हाथ से जैसे वह ध्वज गिरने को होता है कि तभी उसके पीछे से दूसरा बालक आगे आकर उसे मजबूती से थाम लेता है, यह प्रतिक मात्र बस्त्र का टुकड़ा नहीं,यह महापुरुषों के अभाव में भी यह आपके पूर्व इतिहास को बताता है।उन्होंने संस्कारों की बात करते हुये संस्कारों से ही आज का वह बालक कल का नागरिक होता है” यह धर्मायतन एक प्रकार से देश के लिये आवश्यक है आपने जो अपनी संतान की जबाब दारी ली है, एक बार भले ही अपने लिये कम हो जाऐ लेकिन यह आप लोगों का कर्तव्य है कि आप आने बाली पीड़ी को ऐसी शिक्षा दो कि वह न केवल आदर्श बालक बने बल्कि आदर्श बालक से एक आदर्श नागरिक बने और आदर्श नागरिक ही नहीं अपितु वह राष्ट्र के लिये समर्पित राष्ट्रपति बने” उन्होंने उपस्थित सभी वंधुओ को राष्ट्रीय भावना जगाते हुये कहा कि देश क्या है? भारतीय संस्कृति में एक आदर्श पुरुष ही आदर्श नागरिक माना जाता है आदर्श नागरिकों से ही यह देश आगे बड़ता है,और विशाल भावों से ही विशाल कार्य संपन्न होते है। वर्तमान समय में आधुनिक सामग्री से जो संत निवास बनाये जा रहे है उनकी उम्र कम होती है,प्राचीन काल में संत निवास तो नहीं बनते थे वल्कि विशाल पाषाण के जिनालयों का निर्माण किया जाता था जिनकी उम्र हजारों हजार वर्ष होती थी, आप लोगों की दृष्टि भी यंहा पर पाषाण का भव्य जिनालय बनाने की है, जिनकी उम्र कम से कम एक हजार वर्ष होगी “ऐसा स्थान संकुचित भावों से नही बल्कि विशाल भावों से विशाल आंगन में बनता है, जंहा पर कोई भी संत आ जाऐ तो वह उनके दर्शन करे और भगवान का अभिषेक पूजन जाप विधान आदि करे तो स्थान छोटा न पड़े उन्होंने रायपुर की जैन समाज को आशीर्वाद देते हुये कहा कि आप सभी लोग अपने आवश्यक कार्यों को करते हुये अपनी संतान को संस्कारित करने के लिये यह स्थान वनाने जा रहे है, आचार्य श्री ने कहा कि यह भारत है और यह ऐसे ही नहीं बचा है, तूफानों और आंधिओं के बीच में जंहा अनेक प्रकार के प्राकृतिक प्रकोप आऐ लेकिन आज तक वह धर्म ध्वजा नीचे नहीं गिरी” उन्होंनें कहा कि हमारे पूर्वजों ने ऐसा सिखाया है कि कभी मांगना नहीं यदि “राष्ट्र के लिये चाहिये तो पूरा का पूरा दे दैना, राष्ट्र के लिये दिया गया धन कभी भी खाली नहीं जाता वह राष्ट्र की सुरक्षा के लिये ही काम आता है” उन्होंने कहा कि मजबूत भावनाओं और दृण संकल्प के साथ इस स्थान पर जिनालय का निर्माण करो हजारों हजार लोग उससे लभान्वित हों। उन्होंनें कहा कि अपने धन का उपयोग गाड़ करके नहीं वल्कि उसको जिनेन्द्र भगवान के चरणों में समर्पित कर दो। उन्होंने कहा कि ऐसे जिनालयों के निर्माण के साथ ही भारत मजबूती के साथ खडा हुआ है।उन्होंने कहा कि ऐसा निर्माण करो कि वह जल्दी से जल्दी लोगों के सामने आ सके। आचार्य श्री ने हायकू कहते हुये कहा कि “भारत वसा उनसे जिनका घर कभी न वसा” दयोदय महासंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मालवीय रोड़ स्थित श्री आदिनाथ दि. जैन बड़ा मंदिर में एक बड़ा भू खंड पर 171 फिट का त्रिकाल चौवीसी जिनालय एवं सहस्त्रकूट जिनालय बनाने का भाव रायपुर की सकल दि. जैन समाज का हुआ एवं बड़ा मंदिर टृस्ट कमेटी के माध्यम से उपरोक्त भाव आचार्य श्री के समक्ष रखा तो आचार्य श्री ने स्वीकृति देते हुये कहा कि अच्छे कार्य करने के लिये हम कभी न नहीं करते है आप लोगों ने जो भावना रखी है उसे मितव्ययिता के साथ पूर्ण करो धर्म सभा में आज रायपुर ही नहीं अपितु संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न अंचलों से एवं महा नगर के सभी जिनालय एवं कालोनियों से समाज वंधुओ ने आकर आचार्य श्री संघ के समक्ष अपने परिवार के साथ आकर अपने अपने दान की घोषणा की एवं श्री फल समर्पित कर आशीर्वाद लिया प्रवचन उपरांत गुरुदेव की आहार चर्या संपन्न हुई आजका पड़गाहन एवं आहार कराने का सौभाग्य बड़ा जैन मंदिर के टृस्टी एवं मंदिर निर्माण के संयोजक नरेन्द्र जैन गुरुकृपा,राजेश जैन रज्जन,एवं प्रदीप जैन विश्वपरिवार को मिला। सभी लोगों ने उनके पुण्य की सराहना करते हुये बधाई दी। आचार्य श्री रायपुर से हुआ मंगल विहार डी.डी.नगर जैन मंदिर के दर्शन करके दुर्ग भिलाई रोड़ पर विहार किया एवं सांकरा गांव में रात्री विश्राम किया एवं गुरुवार की आहार चर्यादौलत वाटिका के सामने जामगांव में होगी

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