गौ- अभ्यारण जरारुधाम में हुआ दीपावली मिलन और अन्नकूट कार्यक्रम
रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक अंतर्गत मगरोन ग्राम में नर्मदा खंड सेवा संस्थान गौअभ्यारण दीपावली मिलन और अन्नकूट कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल उपस्थित रहे। इस मौके पर लोकसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों के साथ आस पास के ग्रामीण भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

गौ शाला में लहलहाने लगे फलदार वृक्ष :नर्मदाखंड सेवा संस्थान के अथक प्रयासों से यहां गौशाला निर्माण कार्य किया गया और पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। गौ अभ्यारण्य में पानी,सड़क की सुविधा के साथ साथ पिछले वर्षो में सघन पौधरोपण भी किया गया था जो अब काफी बड़े हो चुके है और हरियाली के साथ फलदार वृक्ष भी लहलहाने लगे है। निकट ही धार्मिक स्थल जरारूधाम से बहने वाले जल स्रोत के कारण भी यहां साल भर पानी की कमी नहीं रहती है। जहां श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।

जरारुधाम अब दमोह की पहचान बन गया है
नर्मदा खंड सेवा संस्थान का अन्नकूट कार्यक्रम जरारूधाम का सार्वजनिक कार्यक्रम हैं, सभी लोग मिलकर इसे करते हैं, अन्नकूट का उत्सव पुरातन पंरपरा हैं, इसमें निमंत्रण किसी को नहीं जाता, साआनंद आकर लोग इसमें हिस्सेदार बनते हैं, नियमित तौर पर यह जरारूधाम की परंपरा बन चुकी हैं।

इस संबंध में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जरारूधाम अब दमोह की पहचान बन गया है,जब शुरुआत किया था तब चंद लोग थे,जिसने वह समय देखा है वे गौरांवित महसूस करते हैं। अन्नकूट का कार्यक्रम भी एक पहचान,परंपरा बन गया है अन्नकूट का सीधा संबंध जरारुधाम गौ

अभ्यारण्य से हैं जो यहां एक दाना प्रसाद के रूप में पाता है वह गौ माता के सुख दुख में अपने आप को शामिल कर लेता है,उसी ताकत का परिणाम है कि आप जो विस्तार देख रहे है,निमित्त कोई और हो सकता है लेकिन कोई व्यक्ति यह काम नहीं कर सकता,उसमें आप लोगों को भी शामिल करता हूं। अन्नकूट में सामान्य सूचना पर प्रतिवर्ष जो लोग आते हैं उनके प्रति हृदय से आभारी हूं उनके सहयोग के प्रति आभारी हूं कि कोई इतनी दूर से अपनी मर्जी से चल कर आए और गौ अभ्यारण्य के लिए सेवा,श्रम,धन और भावनाएं देकर जाए ये वास्तव में बहुत बड़ी बात है,ये जरारुधाम की कृपा मानता हूं उनकी कृपा से निष्कलंक तौर पर यह परंपरा आगे बढ़ रही है।