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दशहरा पर्व:: नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व

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नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व दशहरा के दिन इसके दर्शन होने से धन और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि दशहरा के दिन किसी भी समय नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं आप जो भी काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलती है।
दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ मानने की एक पौराणिक कथा है. इस पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. पुराणों के अनुसार रावण का वध करने के बाद भगवान राम पर ब्रह्माण हत्या का पाप लगा था. इससे पाप से मुक्ति पाने के लिए प्रभु राम ने भगवान शिव की आराधना की थी।

नीलकंठ पक्षी सारी मनोकामनाएं पूरी करने वाला है. मान्‍यता है कि नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने से व्‍यक्ति का भाग्‍य चमक जाता है, उसे हर काम में सफलता मिलने लगती है. सुख-समृद्धि मिलता है.शिव जी ने विष को अपने कंठ के नीचे धारण कर लिया था. यानी विष को गले से नीचे जाने ही नहीं दिया. विष के प्रभाव से भगवान भोले का कंठ नीला पड़ गया और उनका एक नाम नीलकंठ भी पड़ा ।नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। उसी समय उनकी पत्नी, पार्वती ने उनका गला दबाया जिससे कि विष उनके पेट तक नहीं पहुंचे। इस तरह, विष उनके गले में बना रहा।ऐसा माना जाता है कि यहीं पर भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का सेवन किया था । इसके कारण, उनका कंठ नीले रंग का हो गया, इस प्रकार शिव को नीलकंठ का नाम दिया गया। यहां के सदियों पुराने मंदिर दिव्य आभा और पौराणिक वातावरण को अपने में समेटे हुए हैं।

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