कांग्रेस ने बुधनी से शिवराजसिंह चौहान के खिलाफ बनाया हे उम्मीदवार
सीहोर से अनुराग शर्मा
18 वर्षों से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को उनके ही घर में चुनौती देने भेजा गया कांग्रेस का प्रत्याशी विक्रम मस्ताल आखिर है कौन?
आज सुबह-सुबह नवरात्री के पावन पर्व पर देश की सबसे पुरानी पार्टी ने अपने विधानसभा चुनाव के प्रत्यशियों की एक सूची जारी की जिसमें सीहोर ज़िले की चार विधानसभाओं में से तीन पर उसने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।
भाजपा ने जहाँ आष्टा के उमीदवार का नाम गुप्त रखा है वहीँ कांग्रेस ने भी एक सीट पर अपने प्रत्याशी का नाम साझा नहीं किया है।
सीहोर से शशांक सक्सेना व आष्टा से कमल चौहान परिचित चेहरे हैं और वह कांग्रेस का एक अच्छा फैसला भी माना जा रहा है, पर जिस सीट पर भाजपा की जीत पक्की मानी जाती है उस सीट पर एक नया नाम दिखाई पड़ता है, और वो नाम है विक्रम मस्ताल।
अब सवाल यह उठता है की आखिर ये विक्रम मस्ताल हैं कौन जो 19वी सदी में आये रामानंद सागर के लोकप्रिय टीवी धारावाहिक विक्रम-बेताल के चरित्र बेताल की भांति अचानक से बुधनी के कन्धों पर आ लटके और दूसरा सवाल यह कि क्या विक्रम प्रखर रणनीतिज्ञ, कुशल एवं चतुर साशक शिवराज सिंह चौहान जो कांग्रेस की मध्य प्रदेश टीम के कप्तान व केन्द्ररूपी नेता कमल नाथ को पटकनी दे देते हैं उनके ऊपर अतार्थ उनके कन्धों पर काबिज हो पाएंगे? खेर यह तो दिसंबर 03 को ही फैसला होगा बहरहाल आज हम ये जानते हैं कि आखिर यह उस्ताद हैं कौन?
सुबह-सुबह नाम पढ़कर गूगल तो कई लोगों ने कर लिया होगा पर चलिये हम आपको गूगल से परे इस युवा नेता के बारे में कुछ बताते हैं।
विक्रम पेशे से एक अभिनेता और निर्देशक हैं जिन्होंने करीब ३ महीने पहले ही कांग्रेस का दामन थामा था। वह सीहोर जिले के बुधनी तहसील में सलकनपुर के समीपस्थ ग्राम इटारसी में जन्मे व ग्राम बांया से उन्होंने हाई स्कूल तक पढाई की।
हाई स्कूल की पढाई के बाद वह आगे पढ़ाई करने मुंबई चले गए जहाँ उन्होंने अभिनय में हाथ आजमाया। लम्बी चौड़ी कद काठी के धनि विक्रम को 2008 में निदेशक आनंद सागर द्वारा निर्मित रामायण में हनुमान का रोल करने का मौक़ा मिला जिससे उन्हें खासी लोकप्रियता मिली, फिर उन्होंने कई फिल्में की और फिर प्रकाश झा द्वारा निर्मित लोकप्रिय वेब सीरीज आश्रम ३ में एक पुलिस अफसर का छोटा पर दमदार रोल निभाया। विक्रम के खाते में टॉप गियर, बेटल ऑफ़ सारागढ़ी व साक्षी जैसी फिल्मे भी हैं।
विक्रम ने अपनी राजनितिक पारी की शुरुआत में ही बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना चुना है।अब यह देखना दिलचस्ब होगा की क्या वह 17 नवम्बर को हवाओं का रुख बदल पाएंगे? ?