सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
भोपाल ।शहर की रंगमंच को समर्पित इरा सोसाइटी ऑफ़ आर्ट एंड कल्चर वेलफेयर समिति द्वारा नवीन हास्य नाटक “ए.सी बाथरूम” मंचन गत दिवस शहीद भवन में सम्पन्न हुआ इस नाटक के लेखक हैं वसीम खान और इसका निर्देशन भोपाल शहर के जाने-माने नाट्य निर्देशक, फिल्म टीवी कलाकार तारिक़ मिर्जा ने किया
नाटक *’ए.सी. बाथरूम’* की कहानी
नाटक शुरू होता है एक परिवार से जिसके मुखिया चौधरी साहब है । चौधरी साहब उनकी पत्नी ललिता चौधरी और उनकी बेटी टिनी चौधरी है । चौधरी साहब के घर में बाथरूम का ए.सी खराब हो जाता है और इसके लिए तीनों घर में काफी परेशान हो रहे होते हैं । तभी चौधरी साहब की पत्नी अखबार में विज्ञापन देती है उन्हें एक कुक चाहिए । चौधरी साहब भी ए.सी. मैकेनिक को बुलाते हैं । कूक का विज्ञापन देख सब आते हैं चौधरी साहब सबको ए.सी सुधारने वाला समझते हैं । अलग-अलग लोग आते हैं जैसे डॉक्टर,टेलीफोन वाला और पोस्ट मैन । चौधरी साहब टेलीफोन वाले को ए.सी मैकेनिक समझ लेते हैं और उन दोनों के बीच में मिसकम्युनिकेशन हो जाता है इस बीच घर में कुक की एंट्री हो जाती है, कूक एक शराबी है और चौधरी साहब उसको भी ए.सी मैकेनिक समझ लेते हैं और उनके बीच बहस होने लगती है यहां हास्य उत्पन होता है और असल में पता चलता है कि वह कूक है । चौधरी साहब की पत्नी ललिता की तबीयत खराब रहती है तो वो डॉक्टर को बुलाती है । कूक डॉक्टर भी

बोलता है इस घर में कुछ लफड़ा है, जो भी चौधरी साहब से कुछ बात करता है चौधरी साहब बाथरूम भेज देते है, आप बाथरूम में मत जाइएगा क्योंकि वहां पर कोई भयंकर बला का आवास है । चौधरी घर आने जाने वाले को सबसे पहले बाथरूम में घुसेड़ते हैं । अब डॉक्टर समझ जाता है और चौधरी के लाख बोलने पर भी बाथरुम में नहीं जाता और चौधरी साहब डॉक्टर को बार-बार बाथरूम में जाने के लिए कहते हैं और डॉक्टर साहब बार-बार अपने पेशेंट को ढूंढते रहते हैं पेशेंट ललिता चौधरी होती है और बाद में पता चलता है वो डॉक्टर है मैकेनिक नही है । इसी बीच खड़क का फोन आता है और वह कहता है कि अरे आज गुल्लू ए.सी मैकेनिक नहीं आ पाएगा उसकी बीवी आएगी ए.सी सुधारने । घर मे ललिता की सहेली आती है तो चौधरी साहब उसको भी ए. सी

सुधारने वाली समझते है । जब वो चली जाती है तो अंत में गुल्लू मैकेनिक वहां पहुंच जाता है । तब चौधरी साहब सोचते हैं कि ये भी कोई और होगा उसको मेकेनिक नही समझते और खूब हसी मज़ाक होता है । और वो गुस्सा होकर चला जाता है । उसके जाने के बाद चौधरी को पता चलता है कि यही गुल्लू मैकेनिक था और वह दोनों अपना सर पकड़ कर बैठ जाते हैं और फिर वही रोज की परेशानी शुरू हो जाती है और बाथरूम वैसा का वैसा ही रहता है ।मंच पर तारिक मिर्ज़ा, रेणु देवी शुक्ला, सुनीता शंखधर, किरण यादव, मकसूद ख़ान एवम अहसान मलिक ने अपने अभिनय से नाटक में चार चांद लगाए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में में नूरजहां साजिद ( कांग्रेस महिला मोर्चा अध्यक्ष) , अमीन राजा वरिष्ठ अधिवक्ता और आसिफ अली काँग्रेस नेता विशेष रूप से उपस्थित थे