छतरपुर के डिजिटल और सोशल मीडिया के पत्रकार मिंटू दुबे अभी भी जेल में हैं । वैसे तो थानेदार उनको पहले ही चेहरे पर पेशाब करके सजा दे चुका है । पुलिस उनकी पहचान के लिए शिकायतकर्ता को भी नही बुला रही है ।शिकायत में लिखा है कि रात सवा बारह बजे पेड़ के नीचे गुटका बेचने वाली दुकान बंद करके जा रहा था तो उसके करीब साढ़े तीन हजार रुपए छीन लिए ।इस एफ आई आर में मिंटू दुबे का नाम ही नही लिखा है । कमाल की बात है कि नियमानुसार रात सवा बारह बजे तक कोई दुकान खोल ही नही सकता । मान लिया जाए कि दिन भर की कमाई साढ़े तीन हजार रुपए होती है तो महीने में वह लाख रुपए कमाता है । लाख रुपए कमाने वाला पेड़ के नीचे खुले में गुटका बेचता है और नगरपालिका को कोई टैक्स नहीं देता न ही। इनकम टैक्स भरता है । प्रथम दृष्टया यह साफ है कि पुलिस ने पत्रकार का उत्पीड़न करने के लिए झूठा मामला गढ़ा है । शर्म आती है ऐसी पुलिस पर ।