रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
दमोह जिले के ग्राम सांगा के निकट वन विभाग के अंतर्गत एक तालाब की मेढ़ टूटने और उसका पानी खेतों में भर जाने का मामला सामने आया।
वन विभाग के अंतर्गत बताए जाने वाले इस तालाब के फूटने पर विभाग की लापरवाही भी सामने आ रही है वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार तालाब निर्माण करते समय भी सही आंकलन नहीं किया गया और अधिक भराव के बाद पानी निकासी की व्यवस्था पर भी यथोचित ध्यान नहीं दिया गया, ग्रामीणों का कहना था कि इस तालाब में विभिन्न नालों या स्थानों से पानी आता है

जिससे जल भराव ज्यादा होता है पर बनाने वालों ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया साथ ही क्षेत्र के रेंजर और बीट गार्ड को भी अवगत करवाया गया था कि मेढ़ में छेद हो गए है उसे बंद किया जाए अन्यथा बारिश के समय मेढ़ में बने हुए छिद्र बड़े हो जाएंगे जिससे पानी तेज गति से जाएगा व मेढ़ टूट सकती है और ठंड व गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को पानी के लिए परेशानी होगी।जिम्मेदारों की लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि तालाब का अस्तित्व ही खतरे में आ गया और भविष्य में इंसान और मवेशियों के लिए उपयोगी पानी बह गया जो जंगल के जानवर, जलचर और पक्षियों को अब बहुत कम सहारा दे पाएगा।
जिले में जल संरक्षण के तमाम प्रयास लगातार जारी रहते है पर एकत्रित जल को सुरक्षित रखने के नाम पर खानापूर्ति के समाचार भी सामने आते रहते है जिससे गर्मियों के मौसम में जल की कमी भी सामने आती रहती है यहां भी सुधार तो नहीं हुआ और गैर जिम्मेदारी के कारण तालाब की मेढ़ जरुर टूट गई और पानी बह गया।

ग्राम वन समिति की बैठक में भी रखा गया था प्रस्ताव
इस तालाब की मेढ़ में दिखाई देने वाले छेद और रिसाव को लेकर ग्राम वन समिति तेजगढ़ की जून माह की बैठक का प्रस्ताव संबंधी एक पत्र भी सामने आया है जिसके अनुसार तालाब में रिसाव हो रहा है बड़ा छेद हो गया है जिससे तालाब फटने की संभावना है मेढ़ कमजोर हो गई है जिसकी मरम्मत की जाए,परंतु उस पर भी अमल नहीं हुआ।