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सरकार ने बदल दिया ये नियम, Pension पाने वालों के लिए आई बड़ी खबर, अब कटेगा आपका ज्यादा पैसा….

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देश के लाखों पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर है. अगर आपने भी 3 मई तक ज्यादा पेंशन पाने के लिए अप्लाई नहीं किया था तो अब आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. केंद्र सरकार की तरफ से आपको हायर पेंशन पाने का एक और मौका दिया जा रही हैं. जी हां… आप उच्च पेंशन के लिए अब 26 जून तक अप्लाई कर सकते हैं. इसके साथ ही श्रम मंत्रालय ने कहा है कि उच्च पेंशन के लिए साइन अप करने वाले और इसके लिए पात्र पाए जाने वाले सदस्यों के लिए नियोक्ता का योगदान 9.49 फीसदी होगा.

पहले 8.33 फीसदी होता था योगदान 

केंद्र सरकार की तरफ से नियोक्ता के योगदान में इजाफा करने का फैसला लिया गया है. बता दें पहले यह योगदान 8.33 फीसदी होता था, लेकिन अब इसको बढञाकर 9.49 फीसदी करने का फैसला लिया गया है. संशोधन के अनुसार, कर्मचारियों को 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक वेतन पर 1.16 फीसदी का अतिरिक्त योगदान करने की आवश्यकता होगी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखा 

सरकार की तरफ से जारी की गई एक अधिसूचना के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा है कि यह SC के 4 नवंबर, 2022 के फैसले के अनुपालन में किया गया है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि मौजूदा कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 अब सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत समाहित हो गया है और सरकार ने SC के फैसले के संबंध में संहिता के प्रावधानों को लागू करने का निर्णय लिया है.

4 नवंबर 2022 को जारी हुआ था आदेश

आपको बता दें इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चार नवंबर, 2022 को अपने आदेश में कहा था कि EPFO को सभी पात्र सदस्यों को ऊंची पेंशन का विकल्प चुनने के लिए चार महीने का समय देना होगा. यह चार माह की अवधि तीन मार्च, 2023 को समाप्त हो रही है. इससे यह धारणा बनी थी कि इसकी अंतिम समय सीमा तीन मई, 2023 है और अब सरकार ने इस तारीख को भी 26 जून तक बढ़ा दिया है, जिससे सभी लोग इसका फायदा ले सकें.

साल 2014 में आखिरी बार हुआ था बदलाव

ईपीएफओ ने इसकी प्रक्रिया का ब्योरा जारी किया था. इसमें बताया गया था कि अंशधारक और उनके नियोक्ता संयुक्त रूप से कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत ऊंची पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. नवंबर, 2022 में उच्चतम न्यायालय ने कर्मचारी पेंशन योजना, 2014 को बरकरार रखा था. इससे पहले 22 अगस्त, 2014 के ईपीएस संशोधन ने पेंशन योग्य वेतन सीमा को 6,500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह कर दिया था. साथ ही सदस्यों और उनके नियोक्ताओं को ईपीएस में उनके वास्तविक वेतन का 8.33 फीसदी योगदान करने की अनुमति दी थी, जिसके अब एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है. ईपीएफओ ने इस बारे में अपने फील्ड कार्यालयों को एक सर्कुलर जारी किया है.

 

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