प्रतिवर्ष की तरह इस साल भी होली का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया गया है। होली के मौके पर लोग रंगोत्सव मनाते हैं। एक दूसरे को रंग लगाकर होली खेलते हैं। इस पर्व की तैयारियां बहुत पहले से होने लगती हैं। वैसे तो होली दो दिन का पर्व होता है, जिसमें पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। हालांकि होली का उत्साह अभी भी जारी है। होली के पांच दिन बाद रंग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन भी रंगोत्सव होता है। कहते हैं कि इस दिन भगवान होली खेलते हैं और देवतागण रंगोत्सव मनाते हैं। होली के पांचवें दिन यानी चैत्र कृष्ण पंचमी को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल 12 मार्च को रंग पंचमी मनाई जा रही है। आइए जानते हैं रंग पंचमी के त्योहार क्यों, कैसे मनाया जाता है और रंग पंचमी से जुड़ी खास बातें।

हर वर्ष रंग पंचमी का पर्व धुलेंडी यानी रंगों वाली होली के पांचवे दिन मनाते हैं। यह चैत्र कृष्ण पंचमी तिथि के दिन मनाए जाने के कारण रंग पंचमी कही जाती है। इसे कृष्ण पंचमी भी कहते हैं। इसके अलावा रंग पंचमी को श्रीपंचमी या देव पंचमी भी कहा जाता है। इस वर्ष रंग पंचमी 12 मार्च 2023 को मनाई जा रही है। यह दिन देवी-देवताओं को समर्पित है और देशभर में काफी धूमधाम से मनाया जाता है।
रंग पंचमी को लेकर जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी। इसलिए इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान कान्हा और राधा रानी को रंग अर्पित करते हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विशेषकर यह त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाते हैं। जुलूस निकाला जाता है, साथ ही अबीर गुलाल उड़ाया जाता है।
रंग पंचमी के मौके पर हर तरफ अबीर गुलाल उड़ाया जाता है। मान्यता है कि उड़ता गुलाल व्यक्ति के सात्विक गुणों में अभिवृद्धि करता है। इस के साथ ही तामसिक और राजसिक गुणों को नष्ट करता है। रंगों वाली होली से यह दिन कुछ अलग होता है। इस दिन होली की तरह लोग शरीर पर रंग नहीं लगाते, बल्कि वातावरण में रंग बिखेरते हैं।