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मुंबई के युवाओं को क्या हुआ? लंबे समय तक नहीं ठीक हो रही खांसी, डॉक्टर्स भी परेशान

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Cough Treatment: कोविड की वजह से पहले से कमजोर इम्यूनिटी और प्रभावित लंग्स के बाद इन्फ्लूएन्ज़ा वायरस का अटैक इन दिनों न केवल लोगों को बीमार कर रहा है, बल्कि एक-एक महीने तक लोगों की खांसी ठीक नहीं हो रही है। ज्यादातर मरीजों में इन्फ्लूएन्ज़ा ए वायरस पाया जा रहा है।

● डॉक्टर्स की ओपीडी में 75 पर्सेंट तक ऐसे केसेस

● लंबे समय तक खांसी ठीक न होने की शिकायत

● तमाम इलाज के बावजूद नहीं ठीक हो रही खांसी

● बिना फेफड़ों की बीमारी वाले इतिहास के युवा

मुंबई: मुंबई के युवा वर्गों में लंबे समय तक खांसी की समस्या देखी जा रही है। रोजाना ओपीडी में आने वाले इन वर्गों के 25 फीसदी से लेकर करीब 75 फीसदी लोगों में खांसी की शिकायतें पाई जा रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इसे संक्रमण, प्रदूषण और वायरल इन्फेक्शन मान रहे हैं। इस साल दिल्ली के साथ-साथ आर्थिक राजधानी मुंबई भी लगातार खराब वायु गुणवत्ता का सामना कर रही है। बुधवार को शहर में 283 एक्यूआई दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। प्रदूषण का श्वसन स्वास्थ्य प्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और ऐसा लगता है कि अब मुंबईकर भी इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सुशील बिंद्रू ने बताया कि सर्दियों के दौरान बहुत सारे वायरल संक्रमण होते हैं। आमतौर पर, मरीजों को पहले 2 दिनों में सर्दी और बुखार होता है और वे 5 दिनों में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से ठीक हो जाते हैं।

रिस्पिरेटरी का कोई इतिहास नहीं

इस बार 20 से 30 वर्ष आयु के युवा जिन्हें किसी भी रेस्पिरेटरी डिसीज का कोई पूर्व इतिहास नहीं है, वे संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और उन्हें खांसी भी हो रही है, जो काफी लंबे समय तक बनी रहती है। यह युवा वर्ग लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का शिकार हो रहे हैं।

संक्रमण भी हो सकता है वजह

सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ.जलील पारकर ने कहा कि यह सच है कि लोग लंबे समय से खांसी की समस्या से जूझ रहे हैं और उनमें से कुछ की सांस भी फूल रही है। इसके लिए प्रदूषण ही नहीं, वायरल संक्रमण जैसे कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं। डॉ.पारकर के मुताबिक उनकी ओपीडी में लगभग 90 प्रतिशत रोगियों में यह समस्या है, जो लंबे समय तक बनी रहती है। इसके कारण जानने के लिए रिसर्च होना चाहिए, क्योंकि कोविड के बाद लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटी है।

कोविड भी हो सकती है वजह

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. स्वप्निल मेहता इन दिनों खांसी के मरीज पहले कोविड से संक्रमित हो चुके थे। वायरल संक्रमण से अगर मरीज शुरू में नहीं संभल पाते हैं, तो दो सप्ताह बाद उनमें सेकंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन विकसित हो जाता है। इन मरीजों पर ऐंटिबायोटिक्स दवाइयां ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पातीं। उन्होंने बताया कि उनकी ओपीडी में लगभग 30 से 40 प्रतिशत रोगी युवा हैं, जो पुरानी खांसी की समस्या के साथ आते हैं। पिछले 6 महीनों से लगातार वे ऐसे रोगियों को अपनी ओपीडी में देख रहे हैं।

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